मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में मतदाता सूची से कथित तौर पर करोड़ों नाम हटाए जाने के विरोध में 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Block), विभिन्न जन-संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल महारैली का आयोजन किया। "वोट चोर, गद्दी छोड़" के नारे के साथ आयोजित इस प्रदर्शन में देश भर से आए लाखों लोगों का हुजूम देखने को मिला।
सड़कों पर उतरा जनसैलाब: विभिन्न वर्गों और राज्यों की भागीदारी
कनॉट प्लेस से मिंटो रोड और रामलीला मैदान तक का पूरा क्षेत्र प्रदर्शनकारियों से भर गया। इस रैली में कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, समाजवादी पार्टी, सीपीआई, राजद और वामपंथी संगठनों के झंडे एक साथ नजर आए।
हरियाणा के झज्जर, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए आम नागरिकों ने अपनी शिकायतें रखीं। झज्जर के एक मतदाता ने अपनी 5 पीढ़ियों के वंशावली रिकॉर्ड का सबूत दिखाते हुए बताया कि वोटर लिस्ट से उनका नाम काटकर उन्हें दोबारा फॉर्म-6 भरने का नोटिस थमा दिया गया है।
'अराजकता' के दावों पर करारा जवाब: गांधीवादी रास्ते पर चलने का संकल्प
गोदी मीडिया द्वारा प्रदर्शन को "अराजकता" बताने के दावों को खारिज करते हुए आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका यह विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर और पंडित नेहरू के सिद्धांतों पर चलकर अपने अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा नहीं होता है, तो देश भर में लोकतांत्रिक तरीके से असहयोग आंदोलन, उपवास और भूख हड़ताल की जाएगी।
साधु-संतों का समर्थन और विविध सामाजिक उपस्थिति
इस महारैली में युवाओं, महिलाओं और कॉर्पोरेट पेशेवरों के साथ-साथ अयोध्या, चित्रकूट और जयपुर से आए साधु-संतों की भी बड़ी उपस्थिति देखने को मिली। सांसद पप्पू यादव के साथ आए संतों ने कहा कि वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस जनसैलाब में शामिल हुए हैं।
विपक्षी नेताओं का दावा है कि यह जन-आक्रोश देश के हर नागरिक के 'एक व्यक्ति, एक वोट' के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।





