राहुल गांधी की रैली को लेकर व्यापारियों की चिट्ठी पर सवाल
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कुछ व्यापारिक संगठनों की ओर से रैली के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए चिट्ठियां लिखे जाने पर सवाल उठाए गए हैं। साप्ताहिक कार्यक्रम ‘देखी जाएगी’ में इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की रैली की तैयारियों और विपक्ष के प्रदर्शन के अधिकार पर बात हुई।
चर्चा में दावा किया गया कि कांग्रेस ने रैली में बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने के लिए पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में तैयारियां की हैं। पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को भीड़ जुटाने के लक्ष्य दिए जाने की बात कही गई। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब पहले बड़े आयोजनों और आंदोलनों के दौरान दिल्ली में कारोबार प्रभावित हुआ, तब व्यापारिक संगठनों ने ऐसी आपत्ति क्यों नहीं जताई। उनका कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार के खिलाफ अपनी बात रखने और रैली करने का अधिकार है।
हरदीप पुरी और चुनाव आयोग को लेकर उठे सवाल
कार्यक्रम में जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी सार्वजनिक चर्चाओं और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की उनसे मुलाकात की तस्वीर को लेकर भी सवाल उठाए गए। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने पुरी के पुराने बयानों और सामने आई तस्वीर के बीच अंतर का दावा किया तथा राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। हालांकि, बातचीत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई।
इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और कथित वोट चोरी को लेकर उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने एसआईआर, चुनावी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और ईवीएम से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता की मांग की। उनका दावा था कि चुनाव आयोग को इन सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए। चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों का पक्ष इस चर्चा में विस्तार से शामिल नहीं था।
सरकार, नौकरशाही और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस
चर्चा में यह भी कहा गया कि सरकार के भीतर से सूचनाएं बाहर आने और अधिकारियों के विपक्ष के संपर्क में होने की खबरें सत्ता के प्रभाव में बदलाव का संकेत हो सकती हैं। वक्ताओं ने इसे नौकरशाही पर नियंत्रण और सरकार की राजनीतिक पकड़ से जोड़कर देखा। साथ ही पुलवामा, उरी, गलवान, पहलगाम और दिल्ली में हुए हमलों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। मणिपुर में जारी हिंसा और प्रधानमंत्री की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
टाटा समूह, मीडिया और चुनावी नतीजों पर चर्चा
कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेदों का मुद्दा उठा। राहुल गांधी के ‘क्रिमिनली डिस्ट्रॉय’ किए जाने संबंधी आरोप का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने दोनों संस्थाओं के फैसलों, नेतृत्व और कंपनी को बाजार में सूचीबद्ध करने की चर्चा की। अमित शाह के आवास पर कथित बैठक का भी उल्लेख हुआ। इन दावों और विवादों पर संबंधित पक्षों का जवाब बातचीत में शामिल नहीं था।
इसके अलावा डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन कानून और खोजी पत्रकारिता पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। चर्चा में कहा गया कि पत्रकारों के स्रोतों की गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका है। अंत में विधान परिषद चुनावों के नतीजों पर बहस हुई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विधान परिषद, राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव में वरीयता आधारित मतदान के कारण बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैलेट चुनावों से जुड़े बयान पर भी सवाल उठाए।
कार्यक्रम में इन मुद्दों के जरिए केंद्र सरकार, विपक्ष, चुनाव आयोग, कॉरपोरेट जगत और मीडिया की भूमिका पर तीखी राजनीतिक बहस सामने आई।





