पंजाब चुनाव से जोड़ा गया कदम
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने सैनी के इस कदम को सीधे तौर पर 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री की नजर अपने राज्य से ज्यादा पंजाब की राजनीति पर है। CM सैनी पर कांग्रेस का हमला तीखा रहा। उनके मुताबिक, सिर्फ पहनावा बदलने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
राजा वारिंग ने तंज कसते हुए कहा कि सैनी शायद पंजाब से चुनाव लड़ने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से नायब सिंह सैनी ने हरियाणा की तुलना में पंजाब में ज्यादा समय बिताया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई नेता अपने गृह राज्य में खुद को हाशिये पर महसूस करता है, तो वह दूसरे राज्य में प्रासंगिकता तलाशने की कोशिश करता है।
ट्रूडो से तुलना
राजा वारिंग ने सैनी की तुलना कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से भी की। उनका कहना था कि पारंपरिक पोशाक या प्रतीकात्मक बदलावों से राजनीतिक भरोसा हासिल नहीं किया जा सकता। जनता विकास और ठोस नीतियों पर भरोसा करती है, न कि प्रतीकात्मक संदेशों पर।
बीजेपी ने सौंपी है बड़ी जिम्मेदारी
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी सैनी को सौंपी है। पिछले कुछ महीनों से वे लगातार पंजाब का दौरा कर रहे हैं और पार्टी कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे विपक्षी दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल कराने के प्रयासों में भी जुटे हैं।
इस दौरान वे राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। CM नायब सिंह सैनी पर कांग्रेस का हमला इसी से जुड़ा है माना जा रहा है कि 2027 के चुनाव में टिकट वितरण और रणनीति तय करने में भी उनकी अहम भूमिका हो सकती है।
2027 चुनाव पर टिकी निगाहें
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित है। फिलहाल राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। भाजपा अभी संगठनात्मक तौर पर कमजोर मानी जाती है, लेकिन पार्टी नेतृत्व आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की रणनीति बना रहा है।
ऐसे में हरियाणा के मुख्यमंत्री का भगवा पगड़ी पहनना महज सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है या चुनावी संदेश, इस पर सियासी घमासान तेज हो गया है। CM सैनी पर कांग्रेस का हमला तीखा रहा। कांग्रेस इसे राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे सामान्य परंपरागत पहनावा बता रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में और गर्मा सकता है।
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