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राज्यसभा चुनाव: राष्ट्रीय लोक मोर्चा-बीजेपी में बातचीत तेज

राष्ट्रीय लोक मोर्चा RLM के प्रमुख Upendra Kushwaha इन दिनों अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सक्रिय हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने हाल ही में दिल्ली में |

राज्यसभा चुनाव: राष्ट्रीय लोक मोर्चा-बीजेपी में बातचीत तेज
फोटो: Rashtriya Lok Morcha (RLM), Bihar political news, Upendra Kushwaha news
बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज़ है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख Upendra Kushwaha इन दिनों अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सक्रिय हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitish Nabin से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि यह बैठक अमित शाह के आवास पर देर रात तक चली, जिसमें राज्यसभा चुनाव और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा हुई।

खुद के लिए राज्यसभा, बेटे के लिए MLC

सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा की प्राथमिक इच्छा राज्यसभा पहुंचने की है। इसके साथ ही वे अपने बेटे दीपक प्रकाश के लिए एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) की सीट चाहते हैं। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की ओर से इस संबंध में संकेत दिए गए थे। ऐसे में अब कुशवाहा इन वादों को अमली जामा पहनाने की कोशिश में जुटे हैं।

हालांकि, मामला सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं है। चर्चा यह भी है कि बीजेपी की ओर से उनकी पार्टी के विलय का प्रस्ताव रखा गया है। पहले यह अटकलें थीं कि कुशवाहा अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा का बीजेपी में विलय कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में वे अपने दल के चुनाव चिन्ह पर ही राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं।

चार विधायकों के सहारे मुश्किल राह 

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास फिलहाल केवल चार विधायक हैं। इतनी सीमित संख्या के बल पर राज्यसभा पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा। हालांकि कोइरी वोटरों के बीच कुशवाहा का प्रभाव अब भी मजबूत बताया जाता है। यही वजह है कि बीजेपी उन्हें साथ लेकर अपने सामाजिक समीकरण को और मजबूत करना चाहती है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की शर्त साफ है, अगर कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय कर लेते हैं तो उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। इतना ही नहीं, उनकी पार्टी के असंतुष्ट विधायकों को भी बीजेपी अपने कोटे से सरकार में जगह दे सकती है।

बीजेपी को क्या होगा फायदा?

अगर विलय होता है तो बिहार विधानसभा में बीजेपी की संख्या 89 से बढ़कर 93 हो सकती है। साथ ही राज्यसभा में भी उसकी ताकत बढ़ेगी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे कदम से केंद्र में कुशवाहा को मंत्री पद मिलने की संभावना भी बन सकती है।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर न तो बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कुशवाहा बीजेपी की शर्तें स्वीकार करेंगे या अपने राजनीतिक अस्तित्व को अलग पहचान के साथ बनाए रखने का रास्ता चुनेंगे।

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