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मध्यप्रदेश की राजनीति में नया मोड़: कमलनाथ का खुलासा, 2020 में क्यों गिरी कांग्रेस सरकार

मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने साल 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने के पीछे की असल वजह का जिक्र करते हुए कई

मध्यप्रदेश की राजनीति में नया मोड़: कमलनाथ का खुलासा, 2020 में क्यों गिरी कांग्रेस सरकार
फोटो: मध्यप्रदेश की राजनीति में नया मोड़: कमलनाथ का खुलासा, 2020 में क्यों गिरी कांग्रेस सरकार
मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने साल 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने के पीछे की असल वजह का जिक्र करते हुए कई अहम बातें सामने रखी हैं। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है और इससे पुराने राजनीतिक समीकरण एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।

कमलनाथ के अनुसार, उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह भ्रम हो गया था कि सरकार को असल में दिग्विजय सिंह नियंत्रित कर रहे हैं। इसी गलतफहमी और आपसी अविश्वास ने पार्टी के भीतर मतभेद को जन्म दिया। सिंधिया ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया और उनके साथ कांग्रेस के 22 विधायक भाजपा में शामिल हो गए, जिसके चलते मार्च 2020 में कमलनाथ की सरकार गिर गई। यह सरकार सिर्फ 15 महीने पुरानी थी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

महत्वाकांक्षा और अंदरूनी मतभेद बने कांग्रेस सरकार के पतन का कारण


कमलनाथ ने साफ कहा कि सरकार का गिरना किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रही राजनीतिक खींचतान और नेतृत्व के बीच असहमति थी। उनका कहना है कि सिंधिया को यह महसूस होने लगा था कि उनकी भूमिका सीमित हो गई है और उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा जो वे चाहते थे। यही कारण रहा कि उन्होंने बाहर का रास्ता चुना।

इस घटनाक्रम से यह भी साफ होता है कि जब दलों के भीतर संवाद की कमी होती है और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं संगठनात्मक हितों पर भारी पड़ने लगती हैं, तब ऐसी अस्थिरता उत्पन्न होती है। कमलनाथ के ताजा बयान को आगामी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया: समय रहते सुनवाई होती तो बच सकती सरकार


इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की समस्याओं और सिंधिया की मांगों पर समय रहते ध्यान दिया गया होता, तो सरकार को बचाया जा सकता था। उन्होंने खुलासा किया कि 2020 में संकट के समय एक बैठक (डिनर मीटिंग) आयोजित की गई थी, जिसमें विवादों को सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।

दिग्विजय सिंह के अनुसार, उन्होंने पहले ही पार्टी को आगाह कर दिया था कि अगर मतभेद जल्दी नहीं सुलझे, तो सरकार को नुकसान हो सकता है। यह बयान इस बात को उजागर करता है कि संचार की कमी और संगठन के भीतर असंतुलन कितनी बड़ी राजनैतिक कीमत दिला सकता है।