एक समय भारतीय टीवी मीडिया में निष्पक्ष और जन सरोकार की पत्रकारिता का प्रतीक माना जाने वाला न्यूज़ चैनल NDTV आज गंभीर वित्तीय संकट और गिरती क्रेडिबिलिटी के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2022 में अडानी समूह द्वारा किए गए अधिग्रहण के बाद से चैनल के राजस्व (Revenue) में भारी गिरावट आई है और घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है।
₹800 करोड़ का फंड जुटाने का फैसला और वित्तीय स्थिति
26 अक्टूबर को हुई NDTV के बोर्ड की बैठक में कंपनी ने अनसिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल परपेचुअल डिबेंचर्स के जरिए 9% वार्षिक ब्याज पर ₹800 करोड़ का फंड जुटाने का निर्णय लिया। इससे पहले सितंबर 2025 में भी कंपनी ने राइट्स इश्यू के माध्यम से लगभग ₹400 करोड़ जुटाए थे।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में NDTV जहाँ ₹53 करोड़ के मुनाफे में था, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर ₹218 करोड़ के घाटे में तब्दील हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में यह घाटा बढ़कर ₹323 करोड़ तक पहुँच गया। मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रोडक्शन पर बढ़ते खर्च के कारण कंपनी की नकदी स्थिति चिंताजनक हो गई है।
RRPR, VCPL और अधिग्रहण का कानूनी इतिहास
वर्ष 2017 में सीबीआई ने NDTV के संस्थापकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ आईसीआईसीआई बैंक लोन मामले में जांच शुरू की थी। इस दौरान रॉय दंपत्ति की कंपनी RRPR होल्डिंग्स ने वीसीपीएल (VCPL) से कर्ज लिया था, जिसके बदले NDTV में 29.18% शेयर गिरवी रखे गए थे।
2022 में अडानी समूह ने वीसीपीएल को खरीदकर NDTV में हिस्सेदारी हासिल की और बाद में ओपन ऑफर के जरिए 26% अतिरिक्त शेयर खरीदकर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया। इसके तुरंत बाद वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने चैनल से इस्तीफा दे दिया। दिलचस्प बात यह है कि अधिग्रहण पूरा होने के बाद एसएटी (SAT) और सीबीआई ने रॉय दंपत्ति को क्लीन चिट दे दी।
मीडिया स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारों पर कसता शिकंजा
अडानी समूह द्वारा डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 'बीक्यू प्राइम' (BQ Prime) के अधिग्रहण और कई स्वतंत्र पत्रकारों पर दायर मानहानि के मुकदमों ने मीडिया जगत में चिंता बढ़ा दी है। कोर्ट के स्टे ऑर्डर और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नोटिसों के माध्यम से कई डिजिटल न्यूज़ आउटलेट्स और पत्रकारों को सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए।





