मीडिया से बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा कि भाजपा में चुनाव लड़ने का फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक रूप से लिया जाता है। इसलिए अगर पार्टी उन्हें किसी दूसरी सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहती है तो वे उसका भी पालन करेंगे।
सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम प्राथमिकता
सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम प्राथमिकता के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वे आगामी चुनाव में एक से ज्यादा सीटों से भी मैदान में उतर सकते हैं। खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भबानीपुर से उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर भी राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं।
जब उनसे इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर इनकार नहीं किया। उन्होंने दोहराया कि जो भी फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, वही उनके लिए अंतिम होगा।
‘पिशी-भाइपो’ वाली राजनीति पर तंज
बातचीत के दौरान अधिकारी ने सत्तारूढ़ दल अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा। सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम प्राथमिकता मिलने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा में फैसले किसी एक व्यक्ति के इशारे पर नहीं लिए जाते।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा “पिशी-भाइपो” यानी बुआ-भतीजा की पार्टी नहीं है। यह टिप्पणी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को लेकर की गई मानी जा रही है।
2021 में नंदीग्राम बना था हाई-प्रोफाइल मुकाबला
नंदीग्राम सीट का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में खास महत्व रखता है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में यह सीट पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गई थी। उस चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने एक बेहद कड़े मुकाबले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पराजित कर दिया था।
हालांकि नंदीग्राम से हारने के बावजूद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी रहीं। बाद में उन्होंने भबानीपुर सीट से उपचुनाव लड़ा और वहां से जीतकर विधानसभा में अपनी वापसी सुनिश्चित की।
नंदीग्राम को बताया राजनीतिक आधार
सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि नंदीग्राम सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं बल्कि उनका राजनीतिक आधार और भावनात्मक जुड़ाव का केंद्र है। इसी कारण उन्होंने इसे आगामी चुनाव के लिए अपनी पहली पसंद बताया है।
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी उन्हें चुनाव नहीं भी लड़ाती है तो भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। वहीं अगर पार्टी उन्हें चुनाव मैदान में उतरने के लिए कहती है, चाहे वह नंदीग्राम हो या कोई दूसरी सीट, वे पूरी जिम्मेदारी के साथ चुनाव लड़ेंगे।
चुनाव से पहले तेज हुई राजनीतिक हलचल
अधिकारी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा नेतृत्व रणनीतिक तौर पर फैसला करता है तो अधिकारी को एक से अधिक सीटों से भी उतारा जा सकता है।
फिलहाल सभी की नजर भाजपा के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी किस सीट से मैदान में उतरेंगे और क्या वे फिर से ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती बनेंगे।
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