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Manipur Violence: CM बीरेन से जुड़ी टेप पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हिंसा कराने का आरोप, 24 को सुनवाई

मणिपुर हिंसा में मुख्यमंत्री ए बीरेन सिंह की कथित भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में एक याचिका दायर की गई थी, |

Manipur Violence: CM बीरेन से जुड़ी टेप पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हिंसा कराने का आरोप, 24 को सुनवाई
फोटो: Supreme Court, CM Biren,
मणिपुर हिंसा में मुख्यमंत्री ए बीरेन सिंह की कथित भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स को शामिल किया गया था। इस पर शीर्ष अदालत ने फॉरेंसिक रिपोर्ट की मांग की और मामले की सुनवाई को 24 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। मणिपुर में मई 2023 से हिंसा की घटनाओं की खबरें आ रही हैं और इस दौरान कई विवादित ऑडियो टेप्स सामने आए हैं, जिनमें आरोप है कि मुख्यमंत्री ए बीरेन सिंह भी इन घटनाओं में शामिल थे। 

 बार एंड बेंच के मुताबिक, एडवोकेट प्रशांत भूषण ने याचिका में टेप रिकॉर्डिंग्स की प्रतिलिपियां प्रस्तुत की और दावा किया कि "ट्रुथ लैब" ने पुष्टि की है कि इन टेप्स में 93 प्रतिशत संभावना है कि यह आवाज मुख्यमंत्री ए बीरेन सिंह की है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने इस लैब का नाम लेकर टिप्पणी की, जिस पर भूषण ने जवाब देते हुए कहा, "ट्रुथ लैब्स की रिपोर्ट एफएसएल रिपोर्ट्स से कहीं अधिक विश्वसनीय है।" भूषण ने आगे कहा, "यह साफ-साफ सुनाई दे रहा है कि मुख्यमंत्री ने हथियारों की लूट को अनुमति दी और हिंसा भड़काने में उनकी भूमिका रही। यह पूरी तरह से स्पष्ट है।" सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार शामिल थे, ने इस मामले पर सुनवाई की। 

कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट ट्रस्ट ने इस मामले में रिट याचिका दायर की थी, जिसमें इन कथित ऑडियो टेप्स की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। 

कोर्ट ने इस पर विचार करते हुए कहा कि "राज्य की स्थिति अभी जटिल है और हमें यह देखना होगा कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट को करनी चाहिए या फिर इसे उच्च न्यायालय को सौंप दिया जाए।" मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने यह भी कहा कि "मुझे इन ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की प्रतिलिपियों की सत्यता के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और हमें यह भी पता होना चाहिए कि फॉरेंसिक रिपोर्ट कब तक आ सकती है।" उन्होंने यह आदेश दिया कि एफएसएल रिपोर्ट को छह हफ्तों के भीतर दाखिल किया जाए, और इसे सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए। 

साथ ही, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित कर दी। इस मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट के आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से सुप्रीम कोर्ट ने बचते हुए कहा कि इसे गंभीरता से देखना होगा और सभी पक्षों को सुनकर ही निर्णय लिया जाएगा।

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