श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को राज्य में पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग वाला एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास कर दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव के पास होने के दौरान सदन में भारी हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
यह प्रस्ताव बीते शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा सदन के पटल पर रखा गया था। हालांकि, विभिन्न दलों के विधायकों द्वारा विस्तृत चर्चा की मांग के चलते इसे सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
सदन में बीजेपी का जोरदार विरोध और मॉक प्रोसीडिंग्स
बीजेपी विधायकों ने शुक्रवार और सोमवार दोनों दिन इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। सोमवार को बहस के दौरान बीजेपी के सदस्य विरोध दर्ज कराते हुए वेल (सदन के बीचों-बीच) में उतर आए। इस दौरान हंगामा कर रहे विधायकों ने कामकाज से संबंधित कागजात फाड़ दिए और वेल में ही समानांतर 'नकली कार्यवाही' (मॉक प्रोसीडिंग्स) चलाकर अपना विरोध जताया।
बीजेपी नेताओं का कहना था कि प्रस्ताव में पूर्व के स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख संविधान का अपमान है और पार्टी इसे सदन में पास नहीं होने देगी।
प्रस्ताव में किन पुरानी मांगों का जिक्र?
सदन द्वारा वॉयस वोट (ध्वनि मत) से पारित इस प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया:
"इस सदन द्वारा 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पास किए गए प्रस्तावों के अलावा, यह सदन भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग करता है और यह तय करता है कि इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जाए।"
उल्लेखनीय है कि 26 जून 2000 को डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने 1953 से पहले वाली स्वायत्तता (Autonomy) बहाल करने का प्रस्ताव पास किया था। वहीं, हाल ही में 6 नवंबर 2024 को मौजूदा सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।
'बीजेपी की चाल में न फंसे': उमर अब्दुल्ला की विधायकों से अपील
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और अन्य सहयोगी दलों के करीब आठ विधायकों ने संशोधन (Amendments) पेश कर इसमें विशेष दर्जे को दोबारा प्रमुखता से जोड़ने की मांग की थी।
सदस्यों के संशोधनों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें अपने प्रस्ताव वापस लेने का आग्रह किया। उमर अब्दुल्ला ने कहा, "हम पहले ही दो बार (2000 और 2024 में) विशेष दर्जे पर प्रस्ताव पारित कर चुके हैं। विशेष दर्जा एक ऐसा अधिकार है जो अन्य राज्यों के पास नहीं है और हमने केंद्र से 2019 से पहले के उन प्रावधानों को वापस माँगा है। हमारे साथी अपने संशोधनों पर जिद न करें, वरना इससे बीजेपी को इस जनहितैषी प्रस्ताव का विरोध करने का बेवजह बहाना मिल जाएगा।"
मुख्यमंत्री की इस भावुक अपील के बाद स्पीकर के पूछने पर सभी आठों विधायकों ने अपने संशोधन वापस ले लिए, जिसके बाद प्रस्ताव को वोटिंग के लिए रखा गया।
वॉयस वोट से पास हुआ प्रस्ताव
बीजेपी विधायकों के शोर-शराबे और वॉकआउट के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव को वोटिंग के लिए डाला, जिसे सदन ने ध्वनि मत से सर्वसम्मति (बीजेपी की अनुपस्थिति में) से पारित कर दिया। अब इस पारित प्रस्ताव को औपचारिक रूप से केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।





