नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) और राजीव चौक का इलाका विपक्षी दलों के 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Alliance) के ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन से गूंज उठा। संविधान क्लब से शुरू हुआ यह मार्च बाराखंभा रोड से होता हुआ कनॉट प्लेस तक पहुँचा। भारी सुरक्षा और पिछले दिनों हुई झड़पों के बावजूद हजारों की संख्या में छात्र, युवा, महिलाएं और देश के विभिन्न राज्यों से आए राजनीतिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तख्तियां थीं, जिन पर 'वोट चोरी' और 'मर्डर ऑफ डेमोक्रेसी' के नारे लिखे थे।
पिछले दिनों हुई हिंसा पर फूटा गुस्सा
रिपोर्टर निवेदिता सांडिल की इस ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय नागरिकों, छात्रों और वकीलों ने खुलकर अपनी बात रखी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 10 और 11 तारीख को इसी कनॉट प्लेस में कुछ उपद्रवी तत्वों और कथित राइट-विंड कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और खासकर छात्राओं के साथ बदसलूकी और मारपीट की थी, जिसे दिल्ली पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। हालांकि, 12 तारीख को विपक्ष के बड़े नेताओं और विशाल जनसमूह के उतरने के बाद वे उपद्रवी तत्व कहीं नजर नहीं आए।
'यह लोकतंत्र और अस्तित्व की लड़ाई है'
मार्च में शामिल राजस्थान, हापुड़, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक पार्टी या जाति की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक के मतदान के अधिकार और संविधान को बचाने की लड़ाई है। लोगों ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार की नीतियों के कारण देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव के प्रतिनिधि, सपा और आरजेडी के नेताओं के साथ-साथ आम जनता ने भी इसमें हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि जब तक एसआईआर (SIR) विवाद और चुनावी निष्पक्षता पर जवाब नहीं मिलता और ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका यह संघर्ष सड़क से संसद तक जारी रहेगा।
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