पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को हुगली जिले के श्रीरामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में SIR की आड़ में राजनीतिक लाभ पाने के लिए वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस गंभीर स्थिति पर रणनीति तैयार करने के लिए विपक्षी 'INDIA' ब्लॉक की एक अहम बैठक आगामी 30 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हो सकती है।
ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से की बातचीत, एकजुटता की अपील
हुगली की रैली के दौरान टीएमसी प्रमुख ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संदेश भेजकर जल्द से जल्द सभी विपक्षी दलों को एक साथ बैठने का आग्रह किया है। दोनों नेताओं के बीच फोन पर भी संवाद हुआ है, जिसमें SIR प्रक्रिया से पैदा हुई चुनौतियों और आयोग की भूमिका पर एक साझा रुख अपनाने पर सहमति बनी है।
इस बीच, निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले ही अपने रुख को स्पष्ट करते हुए विभिन्न कानूनी मंचों पर यह तर्क रखा है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और वैधानिक नियमों के तहत ही की जा रही है।
बंगाल के राजनीतिक धुरविरोधी भी हुए एक मंच पर साथ
चुनाव आयोग के मुद्दे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। राज्य में एक-दूसरे की कट्टर विरोधी मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दल (CPIM) इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं।
माकपा (CPI-M) के वरिष्ठ नेता एम. ए. बेबी ने INDIA गठबंधन के घटक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर तुरंत बैठक बुलाने की अपील की थी, जिसके बाद उन्होंने ममता बनर्जी से भी चर्चा की। माकपा, भाकपा (CPI) और भाकपा-माले (CPI-ML) लिबरेशन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
वहीं, कांग्रेस पार्टी भी 29 सितंबर को होने वाली अपनी कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में इस पूरे घटनाक्रम पर संसद से लेकर सड़क तक की भावी रणनीति तय करेगी।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाने की योजना
विपक्षी दलों की यह नई लामबंदी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद और तेज हो गई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों और प्रशासनिक आदेशों पर आंतरिक रूप से आपत्तियां जताई थीं।
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद, विपक्षी दल अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में एक नया प्रस्ताव (Removal Notice) पेश करने का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों से सलाह के बाद इसे आगामी सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। अगर विपक्ष यह कदम उठाता है, तो आयोग के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ यह उनका तीसरा प्रयास होगा।
30 सितंबर की महाबैठक पर टिकीं नजरें
30 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित यह बैठक विपक्षी एकजुटता का नया शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकती है। यद्यपि बैठक के अंतिम एजेंडे और इसमें शामिल होने वाले नेताओं की अंतिम सूची की औपचारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार SIR प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी-संसदीय कदमों पर चर्चा होना तय माना जा रहा है।





