राजनीतिक विवाद में गर्माहट
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हाल की यात्रा के बाद किए गए कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इस विवाद की जड़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व और उसकी भेदभावपूर्ण विचारधारा में निहित है। थरूर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक मसला नहीं है।
उन्होंने कहा, "बहानों और शब्दों की बाजीगरी से इस समस्या को छिपाया नहीं जा सकता। मल्लिकार्जुन खरगे जी के लिए न्याय, वास्तव में सभी दलितों के लिए न्याय है।" थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।
दलितों की स्थिति पर चिंता
थरूर ने अपने बयान में दलितों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा, "अगर मुख्य विपक्षी पार्टी के अध्यक्ष को इस तरह की मानसिकता का सामना करना पड़ता है, तो आम दलित नागरिकों को किस प्रकार की वास्तविकता का सामना करना पड़ता होगा?" उन्होंने आगे कहा कि यह घटना केवल राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव हैं।
उन्होंने कहा, "यह कोई व्यक्तिगत मामला या राजनीतिक खींचतान नहीं है। हमें उन लोगों को जवाबदेह ठहराना चाहिए जो ऐसी सोच को बढ़ावा देते हैं।" थरूर ने BJP की विचारधारा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह घटना ऐसी मानसिकता को दर्शाती है जो समाज में विभाजन पैदा करती है।
कांग्रेस की माँगें और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
थरूर ने 'शुद्धिकरण' की प्रक्रिया को 'छुआछूत' जैसा कार्य बताते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, "इस घटना को सफाई या शुद्धिकरण बताना अस्वीकार्य है। यह SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।" उन्होंने न्याय, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए इस मामले में कोई भी ढिलाई न बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने उत्तराखंड में 'शुद्धिकरण' की रस्म में शामिल लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत तुरंत FIR दर्ज करने की मांग की। गांधी ने कहा, "यह SC/ST एक्ट का उल्लंघन है और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इस मामले में तत्काल कार्रवाई करें।"





