ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का आक्रमण
कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने की मांग की है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि चुनावी प्रक्रिया की निगरानी में उन्होंने जी2 के अवैध आदेशों को लागू किया है, जिससे वह देश के लिए एक बोझ बन गए हैं। जयराम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संदर्भ में 'जी2' शब्द का उपयोग किया और कहा कि ज्ञानेश कुमार ने अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां द्वारा की गई टिप्पणी का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार में थोड़ी भी शर्म बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का महत्व
कांग्रेस का यह आरोप जस्टिस उज्जल भुइयां की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि मतदान के अधिकार से लाखों भारतीय नागरिकों को वंचित करने वाली किसी भी प्रक्रिया को मनमाना करार दिया है। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने बताया कि संविधान नागरिकों को दो श्रेणियों में नहीं बांटता है - एक वे जो मतदान कर सकते हैं और दूसरे वे जो ऐसा नहीं कर सकते।
भुइयां ने चेतावनी दी कि यदि किसी प्रक्रिया के कारण लाखों नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो जाते हैं, तो यह संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ होगा। ऐसी स्थिति को किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूरी तरह से अवैध तरीके से कार्य किया है और चुनाव आयुक्तों की शक्तियों से संबंधित संसद के कानून का उल्लंघन किया है।
चव्हाण ने कहा कि SIR प्रक्रिया के संदर्भ में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की लिखित आपत्तियों के बाद ज्ञानेश कुमार के कार्यों पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
संविधान की भावना का उल्लंघन
जयराम रमेश ने पुनः जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि मतदान का अधिकार संविधान के मूल ढांचे से जुड़ा हुआ है।
जस्टिस भुइयां ने स्पष्ट किया कि मतदान का अधिकार केवल संसद के कानून से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान के मूल ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कोई भी प्राधिकरण ऐसा करने का अधिकार नहीं रखता और न ही कोई अदालत इसे मान्य ठहरा सकती है।





