उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 21 सितंबर को एक आदेश जारी किया कि अब जाति आधारित राजनीतिक रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। क्योंकि ये रैलियां समाज में..|
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 21 सितंबर को एक आदेश जारी किया कि अब जाति आधारित राजनीतिक रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। क्योंकि ये रैलियां समाज में टकराव और नफरत फैलाती हैं… पब्लिक ऑर्डर और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
योगी सरकार कह रही है कि हम उत्तर प्रदेश से जातिगत भेदभाव मिटाना चाहते हैं। लेकिन खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जातीय गर्व का दंभ भरते हैं। कहते हैं कि उन्हें क्षत्रिय जाति में पैदा होने पर गर्व है। सुनिए योगी आदित्यनाथ का दावा है कि क्षत्रिय वह जाति है, जिसमें भगवान ने भी जन्म लिया है। मतलब इनकी जाति इतनी श्रेष्ठ है कि भगवान को भी जन्म लेते वक्त सोचना पड़ा कि क्षत्रिय जात में जन्म नहीं लिया तो क्षत्रिय गुणों से वंचित रह जाउंगा। जब मुख्यमंत्री में इतना जातीय दंभ भरा है तो सिस्टम में कितना होगा ये बताने की जरूरत नहीं है।
रामजीलाल सुमन के घर करणी सेना का हमला जातिगत भेदभाव नहीं?
आगरा के सपा सांसद रामजीलाल सुमन के घर करणी सेना का हमला याद होगा। कैसे करणी सेना वाले धारदार हथियार और बंदूकें लेकर रामजीलाल के घर पहुंच गए थे। जमकर तोड़फोड़ की थी। एक सांसद के घर पर हमला हुआ हमला करने वाले मुख्यमंत्री की जाति के थे। न करणी सेना पर कोई बड़ा ऐक्शन हुआ और न किसी उपद्रवी पर। हां शक्ति प्रदर्शन करने के लिए प्रशासन की तरफ से अनुमति जरूर दे दी गई। प्रदर्शन में एक लाख के करीब क्षत्रिय और राजपूत जमा हुए। जमकर तलवारें बंदूकें हवा में लहराई गईं। रामजीलाल सुमन और अखिलेश यादव को भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। ऑन कैमरा अखिलेश यादव को जान से मारने की धमकी दी गई। इतना सब हुआ, और पुलिस खड़े होकर तमाशा देखती रही।
एक दलित सांसद के घर हमला होता है… शक्ति प्रदर्शन कर जान से मारने की धमकी दी जाती है। प्रशासन मौन रहता है….। जब सांसद के घर पर हुए हमले पर प्रशासन मौन रह जाता है तो सोचिए एक गरीब दलित-पिछड़ा के साथ होता होगा?
दलित मंत्री दिनेश खटीक ने भेदभाव का लगाया आरोप
उत्तर प्रदेश में एक दलित मंत्री हैं दिनेश खटीक…। खटीक का जुलाई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा कथित Resignation Letter वायरल हुआ। वायरल लेटर में दिनेश खटीक ने कहा, मैं इस्तीफा दे रहा हूं क्योंकि मैं आहत हूं। मुझे अहमियत नहीं दी जा रही, क्योंकि मैं दलित हूं। मंत्री होते हुए भी मेरे पास कोई अधिकार नहीं है। मेरी भूमिका दलित समाज के लिए बेकार है। मुझे मीटिंग में नहीं बुलाया जाता, न ही विभाग से जुड़ी कोई जानकारी दी जाती है। ये दलित समाज का अपमान है।
सोचिए एक मंत्री का यह आरोप है कि दलित होने के कारण भेदभाव हो रहा है। जब दलित मंत्री भेदभाव से अछूता नहीं है तो आम आदमी का कहना ही क्या?
इटावा में यादव कथावाचक के साथ अमानवीयता
अभी हाल ही की बात है, इटावा जिले के दादरपुर गांव में एक यादव कथावाचक के साथ सिर्फ इसलिए अमानवीयता और क्रूरता की हदें पार की गईं, क्योंकि वह ब्राम्हण नहीं था। यादव कथावाचक और उनके साथियों का सिर मुंडवाया गया… पैरों में नाक रगड़वाई गई…और महिला का मूत्र छिड़का गया…। 21वीं सदी में ऐसी घटना… सोच नहीं सकते.. लेकन उत्तर प्रदेश में हुई है। क्या ये घटना योगी सरकार में ब्राह्मणवाद की मानसिकता और जातीय आतंकवाद का घिनौना चेहरा नहीं है? क्या ऐसे मिटाएंगे जातिवाद?
हर दूसरा SO-SCHO सिंह साहब क्यों: अखिलेश यादव
अखिलेश यादव का एक बयान काफी वायरल हुआ था। बयान में अखिलेश ने दावा किया कि आगरा में SHO और SO की टोटल पोस्टिंग 48 है… पीडीए यानी पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक की पोस्टिंग सिर्फ 15 है। बाकी सब सिंह भाई लोग… यानी राजपूत हैं। मैनपुरी में 15 पोस्टिंग हैं, जिसमें पीडीए के सिर्फ 3 हैं। बाकी सब सिंह भाई लोग हैं। इसी तरह और जिलों की पोस्टिंग का भी जिक्र किया और कहा कि हर जगह सिर्फ सिंह सरनेम वाले अधिकारियों को ही कमान दी गई है। योगी आदित्यनाथ पर ये आरोप नए नहीं हैं। उनपर अक्सर जाति विशेष के अधिकारियों को DM SP और सचिव जैसे पदों पर नियुक्त करने के आरोप लगते रहते हैं।
सोशल मीडिया पर शिकंजा, पुलिस डॉक्युमेंटेशन से गायब होगी जाति
आदेश में किसी जाति को महिमामंडित या बदनाम करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट या मैसेज पर अंकुश लगाने की भी बात कही गई है। पुलिस के डॉक्युमेंटेशन प्रॉसेस में भी बड़े बदलाव के आदेश हैं। अब अधिकांश पुलिस रिकॉर्ड में जाति का जिक्र नहीं होगा। FIR, रिकवरी मेमो और अरेस्ट मेमो में आरोपी की जाति नहीं लिखी जाएगी। NCRB और CCTNS में जाति का कॉलम खाली छोड़ा जाएगा। जाति के कॉलम को स्थाई रूप से हटाने के लिए NCRB को पत्र भी लिखा जाएगा। जाति के कॉलम की जगह अब आरोपी के माता-पिता का नाम लिखा जाएगा। सिर्फ SC/ST एक्ट जैसे मामलों में ही जाति लिखी जाएगी।
योगी सरकार का आदेश 16 सितंबर को दिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर आधारित है।
सवालों के घेरे में योगी सरकार?
दिलचस्प बात ये है कि जस्टिस दीवाकर ने ये निर्देश एक ऐसे केस में दिए, जिसका जातिगत भेदभाव से कोई लेना-देना नहीं था…। मामला शराब तस्करी के केस रद्द करने की अपील का था। हालांकि उन्होंने जाति आधारित रैलियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश नहीं दिया था।
योगी आदित्यनाथ का आदेश सवालों के घेरे में है। सबसे ज्यादा सवाल जाति आधारित रैलियों वाले आदेश पर उठ रहे। आशंका है कि अब किसी भी रैली को जाति आधारित बताकर बैन लगाया जा सकता है या परमिशन देने से मना किया जा सकता है। अखिलेश यादव, राहुल गांधी, चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं के लिए दलित-पिछड़ों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे सबसे बड़े हैं। योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे बड़ी चुनौती अखिलेश यादव हैं। जिस तरीके से उन्होंने लोकसभा चुनाव में PDA फॉर्मूले से योगी-मोदी को धूल चटाई। 2027 का चुनाव मुश्किल लग रहा है। ऐसे में यह आदेश PDA फॉर्मूले से निपटने में यूज हो सकता है।
दूसरा सवाल सोशल मीडिया पर कास्ट रिलेटेड पोस्ट की मॉनीटरिंग और एक्शन वाले आदेश पर है। इस आदेश के दुरुपयोग की संभावना काफी ज्यादा है। किसी को भी सिर्फ इस आधार पर जेल भेजा जा सकता है कि उसने किसी जाति की बड़ाई या बुराई की है। यहां तक कि उसका सोशल मीडिया अकाउंट भी सस्पेंड किया जा सकता है। अब जरा सोचिए अगर आप उत्तर प्रदेश में हैं और आपने अपनी किसी पोस्ट में मनुवाद, ब्राम्हणवाद या किसी जाति की खासकर अपरकास्ट की बुराई कर दी, तो आश्चर्य नहीं कि आपको जेल जाना पड़े, मुकदमेबाजी में फंसना पड़े। आपका सोशल मीडिया अकाउंट जाएगा वो अलग..।
इसका दुरुपयोग अपोजीशन के सोशल मीडिया अकाउंट्स को सस्पेंड कराने में किया जा सकता है। समाजवादी पार्टी और यूपी कांग्रेस से जुड़े कई सोशल मीडिया हैंडल हैं, जो दलित-पिछड़ा और अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं। योगी सरकार को ठाकुरों की सरकार बताते हैं। जातिगत भेदभाव के खिलाफ मुखर रहते हैं। खुद अखिलेश यादव और राहुल गांधी भी ऐसी पोस्ट्स करते हैं। योगी सरकार आईटी मिनिस्ट्री से ऐसे अकाउंट्स को बैन करने को कह सकती है।
योगी सरकार पर लगे एक और जातीय भेदभाव के बारे में बताते हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया और योगी सरकार को 1 लाख 37 हजार पदों पर सहायक शिक्षकों की भर्ती का आदेश दिया। योगी सरकार ने 2018 में पहले 68500 पदों के लिए वैकेंसी निकाली, फिर 69000 पदों के लिए…। जनवरी 2019 में परीक्षा हुई। परीक्षा में 4 लाख 10 हजार अभ्यर्थियों ने एग्जाम दिया। फिर जून 2020 में रिजल्ट आया। भर्ती के लिए जनरल कैटेगरी की कटऑफ 67.11 प्रतिशत और ओबीसी की कटऑफ 66.73 प्रतिशत थी। लेकिन रिजल्ट आते ही बवाल मच गया। अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए…। आरोप लगाया कि योगी सरकार हमसे आरक्षण का हक छीन रही है। जनरल कैटेगरी को आधे से ज्यादा सीटें दी गईं है, जबकि OBC और SC को निर्धारित कोटे से भी कम मिला है। 19,000 सीटों का आरक्षण घोटाला हुआ है। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। आरक्षण घोटाला सही पाया गया। हाईकोर्ट ने मौजूदा मेरिट लिस्ट को गलत करार दिया और तीन महीने के अंदर नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया।
एक तरफ सरकार जातिवाद खत्म करने के लिए आदेश जारी करती है। दूसरी तरफ खुद जातिवाद करती पकड़ी जाती है। बराबरी का हक देने वाले आरक्षण डायवर्ट करती पकड़ी जाती है।
सिर्फ सरकार ही नहीं भाजपा नेताओं में जाति दंभ भरा पड़ा है। 23 अगस्त 2025.. बलिया में बिजली विभाग के दलित इंजीनियर लाल सिंह पर भाजपा नेता मुन्ना बहादुर सिंह और उसके 20-25 साथियों ने हमला कर दिया। जमकर थप्पड़ और लात-घूसे बरसाए…।
ये घटनाएं जवाब मांगती हैं.. क्या ऐसे खत्म होगा जातिवाद..? जातिवाद तो तब खत्म होगा जब दलितों-पिछड़ों को न्याय मिलेगा… बराबरी हक मिलेगा…। तब खत्म होगा जब प्रशासन और समाज जाति के नाम पर भेदभाव बंद कर देगा। लेकिन यहां खुद मुख्यमंत्री में ही जातीय दंभ भरा पड़ा है। रामजीलाल सुमन और इटावा कथावाचक जैसी घटनाएं रोज सामने आती रहती हैं। खुद सरकार आरक्षण खत्म करने की कोशिश में पकड़ी जाती है…। ऐसे कैसे खत्म होगा जातिवाद…। सच्चाई ये है कि खात्मा सिर्फ जातिवाद का नहीं… जाति के नाम पर होने वाले शोषण के खात्मे की जरूरत हैं। सरकार कह रही है कि यह आदेश जातिवाद खत्म करेगा। लेकिन इसका मकसद तो कुछ और ही दिखाई देता है…। आपकी क्या राय है कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। वीडियो को लाइक और मॉलिटिक्स को सब्सक्राइब करना न भूलें।
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