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रूस के सस्ते तेल से असल फायदा किसको? समझें पूरा गुणा-गणित

आर्थिक प्रतिबंधों की मार झेल रहे रूस ने अपने क्रूड ऑयल के दाम गिरा दिए। अभी 2025 में जब क्रूड ऑयल का मार्केट रेट 67 डालर के आसपास है, रूसी तेल 60-61 डॉलर |

रूस के सस्ते तेल से असल फायदा किसको? समझें पूरा गुणा-गणित
फोटो: Russian crude oil
रिलायंस इंडस्ट्री... ये नाम आज भारत के हर कोने में गूंजता है। इस साम्राज्य की नींव 1965 में रखी थी मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी ने। उस वक़्त ये बस एक छोटा ट्रेडिंग हाउस था, पॉलिएस्टर के कारोबार से शुरू हुआ। लेकिन आज? Energy से लेकर डेटा और मोबाइल नेटवर्क तक। रिटेल से लेकर फ़ाइनेंस तक। एंटरटेनमेंट से लेकर क्रिकेट तक। आप HBO का शो देखते हैं? वो भी रिलायंस की स्ट्रीमिंग पर चलता है। दुनिया की सबसे महंगी क्रिकेट टीमों में से एक उन्हीं की है। देश के सबसे बड़े चैरिटेबल फ़ाउंडेशन उन्हीं के चलते हैं। और हाल ही में उन्होंने लगभग हर बड़ा फ़ैशन और लक्ज़री ब्रांड खरीद लिया है। 

जामनगर का रिलायंस रिफ़ाइनरी कॉम्प्लेक्स


जामनगर का रिलायंस रिफ़ाइनरी कॉम्प्लेक्स दुनिया की सबसे जटिल और एडवांस्ड रिफ़ाइनरियों में गिना जाता है। कच्चे तेल की सैकड़ों किस्में होती हैं, और ये रिफ़ाइनरी बिना किसी मुश्किल के किसी भी हिस्से का तेल प्रोसेस कर सकती है — चाहे फ़ारस की खाड़ी हो, लैटिन अमेरिका हो या फिर जहां से भी सस्ता दाम मिले। कंपनी का दावा है कि पिछले 25 सालों में जामनगर ने 500 अलग-अलग किस्म के क्रूड ऑयल को प्रोसेस किया है। लेकिन ये महज़ इत्तेफ़ाक नहीं है कि अम्बानी की कमाई BJP के पहले कार्यकाल में ही दो गुनी हो गई थी। 

क्या अंबानी भारत के 'बोस्टन ब्राह्मण' हैं


आज देश में बेरोज़गारी है महंगाई है लेकिन इस व्यक्ति की कमाई लगातार बढ़ रही है। इत्तेफ़ाक नहीं जब ट्रम्प के सलाहकार नवारो एक इंटर्व्यू में कहते हैं कि ‘भारतीय लोगों, कृपया समझें कि यहाँ क्या हो रहा है. ब्राह्मण, भारतीय लोगों की क़ीमत पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं. हमें इसे रोकना होगा.’ यहाँ ब्राह्मण से मतलब था ‘बोस्टन ब्राह्मण’ से। अमेरिका के बोस्टन में ये लोग 19वीं सदी और 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में बहुत ही ज्यादा प्रभावी भूमिका में होते थे। आमतौर पर ये लोग अंग्रेजों के वंशज थे, जो अमेरिका में बस गए थे। इनका बोस्टन में लगभग पूरे व्यापार पर कब्जा था। बोस्टन ब्राह्मण' शब्द लेखक ओलिवर वेंडेल होम्स ने गढ़ा था। उन्होंने 1861 में एक नॉवेल लिखा, जिसमें बोस्टन के कुलीन वर्ग को 'नए इंग्लैंड की ब्राह्मण जाति' बताई। दरअसल बोस्टन ब्राह्मण रहते तो अमेरिका में थे, लेकिन उस दौर में इंग्लैंड के रईसों जैसा जीवन जीते थे। उनका रहन-सहन और सोच इंग्लैड के अमीरों की तरह थी। पैसा बहुत था तो कला और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया। कई स्कूल और कॉलेज खुलवाए। 'बोस्टन लैटिन स्कूल' अमेरिका का पहला हाई स्कूल था तो इन्होंने ही 'हार्वर्ड यूनिवर्सिटी' की स्थापना की जो आज भी प्रतिष्ठित संस्थान है। ट्रम्प के सलाहकार का कहने का मतलब यही था कि भारत में कुछ एक कुलीन वर्ग जैसे अम्बानी अडानी सस्ता तेल ख़रीद रहे हैं लेकिन भारत के लोगों को सस्ता तेल बेच नहीं रहे। इसका नतीजा क्या हुआ points में समझते है।

ट्रंप के टैरिफ की पूरी कहानी 


 30 जुलाई 2025… डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। 4 अगस्त 2025….ट्रंप ने कहा कि भारत न सिर्फ रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि उस तेल का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा भी कमा रहा है। 6 अगस्त 2025…. ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया। 27 अगस्त 2025… ट्रंप का 50% टैरिफ प्रभावी रूप से लागू हो गया। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के मुताबिक, ट्रंप के टैरिफ से अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट 86.5 बिलियन डॉलर से घटकर 50 बिलियन डॉलर रह सकता है। सबसे ज्यादा मार टेक्सटाइल & गारमेंट, ज्वैलरी, स्टील, हैंडक्राफ्ट्स, फिशरीज एंड सीफूड सेक्टर पर पड़ रही है। इन सेक्टर्स के एक्सपोर्ट में 70 प्रतिशत की गिरावट आएगी, जिससे लाखों नौकरियां खतरे में हैं। टेक्सटाइल & गारमेंट्स सेक्टर अमेरिका को हर साल 10 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करता है। ट्रंप के टैरिफ से 30-40% तक ऑर्डर्स गिर गए हैं। 

दूसरा बड़ा झटका जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को लगा है। अमेरिका को करीब 4.8 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करने वाला ये सेक्टर अमेरिकी मार्केट में 33-40% शेयर रखता है। 50% टैरिफ से ऑर्डर्स कैंसेल हो गए हैं। नए ऑडर मिलना भी बंद हो गया है। कई फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर हैं, लाखों कारीगरों की रोजी-रोटी संकट में है। लेदर और फुटवियर सेक्टर का भी बुरा हाल है। 87 मिलियन डॉलर के निर्यात में 40% की गिरावट आई है। वियतनाम जैसे देश अब यूएस मार्केट में भारत की जगह ले रहे हैं। फिशरीज एंड सीफूड सेक्टर अमेरिका को हर साल ढाई बिलियन डॉलर से ज्यादा का एक्सपोर्ट करता है। यह कुल निर्यात का दो तिहाई है। टैरिफ से लाखों मछुआरों के प्रभावित होने की आशंका है। स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर सेक्टर में भी गिरावट आई है। 


भारत अमेरिका को 2.92 बिलियन डॉलर का स्टील या आयरन निर्यात करता है। ये सेक्टर भी टैरिफ से प्रभावित हो रहा है। हैंडक्राफ्ट्स और क्राफ्ट्स सेक्टर में 1.3 बिलियन डालर का एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है। छोटे कारीगरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। केमिकल्स में 3.63 बिलियन डालर के एक्सपोर्ट पर दबाव बढ़ा है। ऑटोमोबाइल्स और पार्ट्स सेक्टर 2.8 बिलियन डालर का अमेरिका को एक्सपोर्ट करता है। ट्रंप के टैरिफ से ऑटो पार्ट्स के एक्सपोर्ट में थोड़ी मंदी आ सकती है। क्योंकि खरीदारों के लिए कार की कीमतें 8-25 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी फूड प्रोसेसिंग सेक्टर, जिसमें बासमती राइस और मसाले शामिल हैं, अब पाकिस्तान और वियतनाम की ओर शिफ्ट हो रहा है। कुल मिलाकर ट्रंप के टैरिफ से भारत के 35-48 बिलियन डालर के एक्सपोर्ट को नुकसान पहुंच सकता है। GDP की ग्रोथरेट में 0.5-1% तक की कमी आ सकती है। सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। लाखों लोगों की रोजी-रोटी छिन सकती है। 

किसकी सेक्योरिटी प्रोटेक्ट कर रहे एस जयशंकर 


ट्रंप के टैरिफ पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर कहते हैं कि हम अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को प्रोटेक्ट करेंगे। लेकिन क्या ये एनेर्जी सेक्योरिटी देश और देश की जनता के लिए है? या व्यक्ति विशेष के लिए..। क्योंकि जनता को तो आज भी उसी महंगे रेट पर पेट्रोल-डीजल मिल रहा है। फायदा तो सिर्फ सरकार और अंबानी को हो रहा है। अब आते हैं असली कहानी पर….। 2021 तक भारत प्रतिदिन लगभग 4.2 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता था। जिसमें रूसी क्रूड ऑयल की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम थी। लेकिन जैसे ही रूस-यूक्रेन वॉर स्टॉर्ट हुई, पिक्चर पूरी बदल गई। 
आर्थिक प्रतिबंधों की मार झेल रहे रूस ने अपने क्रूड ऑयल के दाम गिरा दिए। अभी 2025 में जब क्रूड ऑयल का मार्केट रेट 67 डालर के आसपास है, रूसी तेल 60-61 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड हो रहा, यानी 7 डालर का सीधा डिस्काउंट। मोदी सरकार ने इस डिस्काउंट का फायदा उठाने की सोचा..। और धीरे-धीरे रूस से तेल का आयात बढ़ाने लगी। ये बात अलग है कि इससे जनता को कोई फायदा नहीं होने वाला था।

 सिर्फ 4 साल के अंदर रूसी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट इतना बढ़ा कि रूस हमारा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर बन गया। आज भारत अपनी जरूरत का 35-37 प्रतिशत क्रूड ऑयल रूस से खरीदने लगा है। यानी रोजाना करीब 2 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल सिर्फ रूस से आता है। जून 2025 में तो रिकार्डतोड़ 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात हुआ। सितंबर में इसमें 10-20% की और बढ़ोतरी का अनुमान है। यानी आंकड़ा 3 मिलियन के पार जा सकता है। 

सोचिए कहां पहले 2 प्रतिशत से भी कम इंपोर्ट होता था, अब 35-37 प्रतिशत पहुंच चुका है। सस्ते रूसी तेल से हर साल 2.5 बिलियन डॉलर की बचत हुई है, जबकि दावा किया जा रहा था कि इससे 10-25 बिलियन डॉलर की बचत होगी। सवाल उठता है कि क्या एनेर्जी सेक्योरिटी के नाम पर अंबानी के मुनाफे की सेक्योरिटी तो नहीं की जा रही है? रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफायनरी है। जो हर रोज़ 1.4 मिलियन बैरल कच्चा तेल संधारित कर सकती है। 2021 तक रिलायंस सिर्फ 3% क्रूड ऑयल रूस से मंगाती थी। रूस-यूक्रेन वॉर के बाद ये 50% पर पहुंच गया। 2025 के पहले 7 महीनों में रिलायंस ने 18.3 मिलियन टन रूसी क्रूड इंपोर्ट किया। 2024 के टोटल से सिर्फ 12% कम। जून 2025 में तो 746,000 bpd रूसी तेल जामनगर पहुंचा। रिलायंस ने 2025 के पहले 6 महीनों में 21.66 मिलियन टन रिफाइंड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए, ज्यादातर दक्षिण एशिया, यूरोप और अमेरिका को। सिर्फ 2024-25 में ही रिलायंस ने 60 बिलियन डालर के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए। 

सस्ते रूसी तेल से 16 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त लाभ कमाया

 
इंटरनैशनल मीडिया के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी तेल से 16 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त लाभ कमाया है। अकेले रिलायंस इंडस्ट्रीज ने लगभग 6 बिलियन डॉलर यानी 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त लाभ कमाया है। अंबानी ने सिर्फ पिछले सालों में मोटा मुनाफा नहीं कमाया, आने वाले सालों की कमाई का इंतजाम भी पक्का कर लिया है। दिसंबर 2024 में रिलायंस ने रूस की रोसनेफ्ट के साथ एक समझौता किया। इस डील के तहत अगले 10 सालों तक प्रतिदिन 5 लाख बैरल तक कच्चा तेल भारत आएगा। इसका सालाना मूल्य लगभग 12-13 बिलियन डॉलर बैठेगा। यानी मुनाफे की मशीन अब अगले दशक तक लगातार चलती रहेगी। रिलायंस, रूस से सस्ता तेल खरीदकर मोटा पैसा छाप रही है। जबकि भारत की जनता महंगे पेट्रोल-डीजल की मार झेल रही है। उसे न पेट्रोल-डीजल की कीमतों से राहत मिल रही है, न ही महंगाई से….।  

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