राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस (सीपी सर्कल) और उसके आसपास के इलाकों में शनिवार-रविवार के वीकेंड पर जो चहल-पहल रहती थी, वह आज पूरी तरह गायब है। चुनाव आयोग में कथित धांधली और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए प्रदर्शन से पहले ही पूरे इलाके को पुलिस और अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री) की छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर आ गए हों।
चप्पे-चप्पे पर पहरा और यात्रा पर पाबंदियां
प्रशासन ने प्रदर्शन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं:
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यातायात और परिवहन बाधित: दिल्ली आने वाली ट्रेनें, मेट्रो के कई स्टेशन और एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दिए गए हैं। नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में दर्जनों चेक पॉइंट बनाए गए हैं।
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पैरामिलिट्री और पुलिस की तैनाती: सीपी सर्कल पर भारी फोर्स और पैरामिलिट्री की टुकड़ियां तैनात हैं। ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह के जमावड़े को तुरंत रोका जा सके।
दूर-दराज से पहुंचे छात्र और नागरिकों का आक्रोश
प्रयागराज और अन्य जगहों से आए सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्र और युवा इस दमनकारी नीति से बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि वे संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जगह-जगह रोक दिया। छात्रों का सवाल है कि एक लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अपने मौलिक अधिकारों का प्रयोग करना क्या अपराध बन गया है?
मीडिया कवरेज पर रोक और धुआंधार डिटेंशन
जैसे ही कुछ प्रदर्शनकारियों ने साइड में खड़े होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठानी चाही, पुलिस और पैरामिलिट्री ने उन्हें घेरकर हिरासत (डिटेन) में लेना शुरू कर दिया। स्थिति यह है कि कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी आगे जाने से रोका जा रहा है और वीडियो बनाने पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं। डिटेन किए गए लोगों को बसों में भरकर विशेष कैंपों में भेजा जा रहा है, ताकि राजधानी में विरोध की किसी भी आवाज को पूरी तरह दबाया जा सके।
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