इस दौरान पुलिस को भारी कीमत चुकानी पड़ी, क्योंकि 17 पुलिसकर्मी अपनी जान गंवा बैठे और 1644 पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बावजूद, यूपी पुलिस ने अपना कार्य बखूबी निभाया और कानून व्यवस्था को बनाए रखने में सफलता प्राप्त की। पुलिस ने 924 अपराधियों पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) भी लगाया। एक महत्वपूर्ण घटना के तौर पर, यूपी पुलिस ने पंजाब पुलिस के साथ मिलकर खालिस्तान के तीन आतंकवादियों को मुठभेड़ में ढेर किया।
इसके अलावा, लखनऊ के चिनहट में आईओबी बैंक में डकैती डालने वाले दो अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया और मात्र दो दिन में घटना का खुलासा कर दिया।
पुलिस ने सुलतानपुर जिले में सराफा कारोबारी की दुकान में डकैती डालने वाले अपराधी मंगेश यादव का भी एनकाउंटर किया। माफिया गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए यूपी पुलिस ने 1391 अपराधियों को जेल भेजा। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर यूपी पुलिस ने एंटी रोमियो टीम का गठन किया, जिसने 18,926 आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की।
इसके अतिरिक्त, प्रदेश भर में 212 अवैध टैक्सी स्टैंड को भी हटाया गया, जो अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बने हुए थे।
2024 में यूपी पुलिस ने अयोध्या राम मंदिर में श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में अपनी कुशलता और तत्परता का प्रदर्शन किया। इस सुरक्षा व्यवस्था के लिए यूपी पुलिस को व्यापक प्रशंसा मिली। इसके अलावा, राज्य में टी-20 क्रिकेट मैचों जैसे बड़े आयोजनों को सकुशल कराकर पुलिस ने अपनी क्षमता को साबित किया। बहराइच और संभल में हिंसा के दौरान यूपी पुलिस ने सक्रियता दिखाई और तुरंत सख्त कार्रवाई करते हुए स्थिति पर नियंत्रण पाया, जिससे स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोका जा सका।
इन सभी घटनाओं के साथ, यूपी पुलिस ने यह साबित किया कि वह न केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, बल्कि प्रदेश में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत से काम कर रही है।
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