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सुप्रीम कोर्ट के 2024 के ऐतिहासिक फैसले: चुनावी बॉन्ड से बुलडोजर न्याय तक

चुनावी बॉन्ड योजना रद्द करने से लेकर मदरसा शिक्षा के विनियमन तक, इन फैसलों ने संवैधानिक मूल्यों को पुनर्परिभाषित किया। आइए, इस वर्ष के कुछ प्रमुख निर्णयों पर |

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के ऐतिहासिक फैसले: चुनावी बॉन्ड से बुलडोजर न्याय तक
फोटो: Supreme Court , bulldozer justice, electoral bonds,
साल 2024 भारत की न्यायपालिका के लिए परिवर्तन का वर्ष साबित हुआ। इस साल सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक और नीतिगत फैसले सुनाए, जिनका देश के कानूनी, सामाजिक, और राजनीतिक ताने-बाने पर गहरा असर पड़ा। चुनावी बॉन्ड योजना रद्द करने से लेकर मदरसा शिक्षा के विनियमन तक, इन फैसलों ने संवैधानिक मूल्यों को पुनर्परिभाषित किया। आइए, इस वर्ष के कुछ प्रमुख निर्णयों पर नजर डालें:

1. चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया

15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने 2017 की चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिया। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि यह योजना अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है।  मुख्य निष्कर्ष: गुमनाम राजनीतिक दान पारदर्शिता और लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। चुनावी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय ऐतिहासिक माना गया।

2. विधायकों की रिश्वतखोरी पर विधायी प्रतिरक्षा खत्म

4 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने पी.वी. नरसिम्हा राव केस में 1998 के फैसले को पलटते हुए विधायकों को रिश्वतखोरी के मामलों में प्रतिरक्षा देने से इनकार कर दिया। प्रभाव: भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत किया। संविधान के अनुच्छेद 105(2) और 194(2) के तहत केवल विधायी कार्यों की छूट तक सीमित किया गया।

3. अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) के भीतर उप-वर्गीकरण को मंजूरी

1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी के भीतर आरक्षण लाभों के उप-वर्गीकरण की अनुमति दी। महत्वपूर्ण पहलू: सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम। 2004 के ई.वी. चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले के फैसले को पलटा।

4. जेलों में जाति आधारित भेदभाव पर रोक

13 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जाति आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे असंवैधानिक घोषित किया। निर्णय का महत्व: कैदियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा। जेल मैनुअल में तीन महीने के भीतर संशोधन का निर्देश।

5. बुलडोजर न्याय पर रोक: कानून के शासन की पुष्टि 

13 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मनमानी तरीके से संपत्तियों के ध्वस्तीकरण को असंवैधानिक करार दिया। प्रभाव: उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों को स्थापित किया। अवैध निर्माण के विनियमन के लिए दिशानिर्देश पेश किए।

6. उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा अधिनियम को वैध ठहराया 

5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा अधिनियम, 2004 को संवैधानिक घोषित किया। फैसले का निष्कर्ष: मदरसा शिक्षा के अधिकार की रक्षा। कानून के धर्मनिरपेक्षता सिद्धांत के उल्लंघन के दावे को खारिज किया।

7. नागरिकता अधिनियम की धारा 6A वैध 

अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने असम समझौते के तहत नागरिकता अधिनियम की धारा 6A को संवैधानिक करार दिया। मुख्य बिंदु: असम की जनसांख्यिकीय संरचना की सुरक्षा। असम समझौते की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को मान्यता।

8. बिलकिस बानो मामला: दोषियों की रिहाई रद्द

8 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों की माफी को रद्द कर दिया। निर्णय का महत्व: महिलाओं के अधिकारों और न्याय की रक्षा। राज्य सरकारों को सजा माफी के दुरुपयोग से रोका।

9. बाल पोर्नोग्राफी पर सख्त रुख 

23 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने बाल पोर्नोग्राफी को POCSO अधिनियम के तहत अपराध घोषित किया। निर्णय के पहलू: बाल यौन शोषण सामग्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई। ‘बाल पोर्नोग्राफी’ शब्दावली के स्थान पर अधिक संवेदनशील भाषा अपनाने का निर्देश।

10. सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामलों में निष्पक्षता

 सुप्रीम कोर्ट ने सांप्रदायिक तनाव के मामलों में मनमाने ढंग से की गई कार्रवाई पर रोक लगाई। प्रभाव: कार्यपालिका की सीमाओं का निर्धारण। निष्पक्ष न्याय की अवधारणा को मजबूत किया।   साल 2024 भारत के न्यायिक इतिहास में संवैधानिक और नीतिगत फैसलों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। सुप्रीम कोर्ट के ये फैसले न केवल कानूनी व्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में समानता, पारदर्शिता और न्याय को बढ़ावा देते हैं।