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राज्य में तैनात केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ CBI जांच की स्वीकृति: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें उसने कहा कि सीबीआई को केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य सरकारों से |

राज्य में तैनात केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ CBI जांच की स्वीकृति: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
फोटो: CBI, Supreme Court,
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें उसने कहा कि सीबीआई को केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य सरकारों से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। यह आदेश उस मामले से संबंधित है, जिसमें आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने दो केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की जांच को रद्द कर दिया था। 

जस्टिस सी. टी. रविकुमार और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने 2 जनवरी को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें राज्य सरकार से नई सहमति की आवश्यकता का तर्क दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केंद्रीय कानून, विशेषकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत है, जो एक केंद्रीय कानून है और इसमें शामिल अपराध भी केंद्रीय स्तर पर हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई को इन मामलों की जांच करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

यह मामला तब सामने आया, जब आंध्र प्रदेश में कार्यरत केंद्र सरकार के दो कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। इन कर्मचारियों ने सीबीआई की जांच को चुनौती दी थी, और यह तर्क दिया था कि डीएसपीई अधिनियम, 1946 के तहत जो सामान्य सहमति पूर्व में दी गई थी, वह विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश राज्य पर लागू नहीं होती। हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए सीबीआई की एफआईआर को रद्द कर दिया था और नई सहमति की आवश्यकता बताई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बावजूद, 2014 के ज्ञापन और सरकारी आदेश के तहत पहले से ही दी गई सहमति लागू रहती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के क्षेत्रीय सीमाओं में घटित केंद्रीय अपराधों की जांच में राज्य सरकार की नई सहमति की आवश्यकता नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि हाई कोर्ट का निर्णय गलत था और इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।

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