क्या है मामला?
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी नरेश मीना उर्फ नरसाराम मीना को सितंबर 2024 में आगरा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत गिरफ्तार किया था। यह मामला आगरा के खंदौली पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर उससे 9 लाख रुपये ऐंठे और फिर उसका यौन शोषण किया। बाद में, उसने पीड़िता का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित कर दिया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि लगाए गए आरोप निराधार हैं और एफआईआर दर्ज करने में चार महीने की देरी भी इस दावे को संदिग्ध बनाती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उसे फंसाया गया है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार कोई ऐसी असाधारण परिस्थिति पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जमानत का मूल उद्देश्य मुकदमे में अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। जब तक अभियुक्त दोषी सिद्ध नहीं होता, तब तक उसे निर्दोष मानने का सिद्धांत लागू होता है।
कोर्ट ने आगे कहा, "जमानत एक नियम है और जेल एक अपवाद।" आरोपी के खिलाफ कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने के आधार पर उसे जमानत दे दी गई। हालांकि, जमानत की शर्त के रूप में उसे तीन महीने के भीतर पीड़िता से विवाह करना अनिवार्य होगा।
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