रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के लिए अमेरिका ने दो B-2 स्टील्थ बमवर्षकों का इस्तेमाल किया, जो परमाणु बम गिराने की क्षमता रखते हैं। बताया जा रहा है कि यह अमेरिका द्वारा इस तरह के बमों के प्रयोग का पहला मामला है। हमले के बाद ट्रंप ने तीखा संदेश देते हुए कहा, “ईरान को अब शांति के रास्ते पर आना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो आने वाले हमले कहीं ज्यादा बड़े होंगे। वे हमारे लोगों की हत्या कर रहे हैं। कासिम सुलेमानी ने कई निर्दोषों की जान ली थी। मैंने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि इसे और नहीं चलने दूंगा।”
अमेरिकी हमले के तुरंत बाद इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा,
“राष्ट्रपति ट्रंप ने वह कर दिखाया जो दुनिया का कोई और देश नहीं कर सकता। यह फैसला इतिहास को बदल देगा।” ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने पहले ही अमेरिका को चेतावनी दी थी कि यदि वह इस संघर्ष में कूदता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी हाल ही में कहा था कि अमेरिका का हस्तक्षेप क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल देगा।
इस बीच, भारत सरकार ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत ईरान में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है। ईरान में भारतीय दूतावास ने बताया है कि भारत न केवल अपने नागरिकों को बल्कि नेपाल और श्रीलंका के नागरिकों को भी उनके अनुरोध पर निकालने में मदद कर रहा है।





