केजरीवाल ने यह दावा किया कि उनकी सरकार के तहत दिल्ली के लोगों को हर महीने 25,000 रुपये तक का लाभ मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी सत्ता में आई, तो वह सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद कर देगी, क्योंकि यह उनके मॉडल का हिस्सा नहीं है। केजरीवाल ने इस चुनाव को केवल दिल्ली का चुनाव न बताते हुए इसे "देश बचाने का चुनाव" करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता से मिलने वाले टैक्स का सही उपयोग तय करने का यह मौका है। उन्होंने कहा कि सरकारें टैक्स के पैसे को दो तरीकों से खर्च कर सकती हैं—या तो इसे जनता के लिए स्कूल, अस्पताल और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करें या इसे अपने अमीर दोस्तों के कर्ज माफ करने में लगा दें।
केंद्र सरकार पर 10 लाख करोड़ रुपये की कर्जमाफी का आरोप
केजरीवाल ने दावा किया कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने बीते पांच वर्षों में 400-500 लोगों का 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है। उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति पर 47,000 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे केवल 4,500 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया। एक और मामला था, जहां 6,000 करोड़ रुपये के कर्ज को 1,500 करोड़ रुपये में सुलझा दिया गया। इसके अलावा, दो अन्य लोगों का कुल 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया गया।
दिल्ली की जनता से भावुक अपील करते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह पैसा जनता का है। इसे आपके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना चाहिए, न कि अमीरों के कर्ज माफ करने पर। उन्होंने इस चुनाव को दिल्ली की जनता के भविष्य और उनके अधिकारों के लिए निर्णायक करार दिया।
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