हरियाणा के भिवानी ज़िले के सिंघाणी गांव में 13 अगस्त 2025 को नहर किनारे एक खेत में 18 वर्षीय शिक्षिका मनीषा का क्षत-विक्षत शव मिला था। इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी फाइनल क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है, जिसमें मौत का कारण 'मोनोक्रोटोफॉस' (Mono) नामक कीटनाशक जहर पीकर की गई आत्महत्या बताया गया है।
दूसरी ओर, मृतका के पिता संजय कुमार ने सीबीआई की इस क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दाखिल की है। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ, उसकी हत्या की गई और शव को क्षत-विक्षत किया गया।
इन आरोपों के जवाब में सीबीआई ने 12 पन्नों का विस्तृत हलफनामा दायर किया है। मृतका के पिता के वकील हर्ष मोहन सिंह के अनुसार, अब 14 अक्टूबर को सीबीआई के इस जवाब और क्लोजर रिपोर्ट पर बहस होगी, जिसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी।
पिता के आरोप बनाम CBI की फोरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में पिता द्वारा उठाए गए हर सवाल का वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर बिंदुवार जवाब दिया है:
1. हत्या और दुष्कर्म का आरोप
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पिता का दावा: मनीषा की हत्या की गई, उससे दुष्कर्म हुआ, गर्दन काटी गई और शरीर के अंग निकाल लिए गए।
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सीबीआई का जवाब: सीएफएसएल (CFSL) दिल्ली की जांच रिपोर्ट के अनुसार, मनीषा के कपड़ों और स्वैब सैंपल पर किसी पुरुष का डीएनए या सीमन (Semen) नहीं पाया गया। पोस्टमार्टम के दौरान उसके कपड़े (सलवार का नाड़ा) पूरी तरह सुरक्षित पाए गए, जिससे हिंसक झड़प या कपड़े जबरन उतारने के आरोप खारिज होते हैं।
2. चेहरे और सिर पर तेजाब या केमिकल डालने का दावा
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पिता का दावा: पहचान छुपाने के लिए चेहरे को एसिड या केमिकल से जलाया गया।
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सीबीआई का जवाब: बालों और कपड़ों की फोरेंसिक जांच में किसी तेजाब या कोरोसिव केमिकल का अंश नहीं मिला। फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार यह संभव ही नहीं है कि केमिकल से चेहरा जल जाए और कपड़ों या बालों पर उसका कोई निशान न आए।
3. धारदार हथियार से हमला और गर्दन पर कट
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पिता का दावा: गर्दन का घाव धारदार हथियार से हमले का परिणाम था।
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सीबीआई का जवाब: हिस्टोपैथोलॉजी (Histopathology) जांच में गर्दन के घाव पर जीवित अवस्था में चोट लगने वाले कोई लक्षण (जैसे रक्तस्राव या सूजन) नहीं मिले। टूटी हुई ग्रीवा हड्डियों के सिरों पर जमने वाला खून अनुपस्थित था, जिससे साबित हुआ कि यह घाव मौत के बाद जानवरों द्वारा काटने और नोंचने से बना था।
4. शव को दूसरी जगह से लाकर फेंकने की आशंका
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पिता का दावा: मनीषा को किसी और स्थान पर मारकर खेत में फेंका गया, जहां गाड़ियों के निशान थे।
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सीबीआई का जवाब: भिवानी मोबाइल फोरेंसिक टीम और घटनास्थल की तस्वीरों में किसी वाहन या टायर के निशान नहीं मिले। मनीषा के जूतों और खेत की मिट्टी का सीएफएसएल मिलान 100% सही पाया गया। इसके अलावा, एक प्रत्यक्षदर्शी (मीना) ने सुबह 6:20 बजे 7-8 आवारा कुत्तों को शव को खींचते देखा था, जिससे घसीटने के निशान बने।
5. सुसाइड नोट और लिखावट पर संदेह
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पिता का दावा: मौके से मिला सुसाइड नोट फर्जी या दबाव में लिखवाया गया हो सकता है।
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सीबीआई का जवाब: पुलिस को मौके से 2 सुसाइड नोट मिले थे, जिनमें नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में चयन न होने और प्राइवेट कॉलेज की भारी फीस के कारण तनाव का जिक्र था। सीएफएसएल दिल्ली के तीन सीनियर हैंडराइटिंग विशेषज्ञों ने मनीषा के पुराने रजिस्टरों और टेस्ट पेपर्स से लिखावट का मिलान कर पुष्टि की कि सुसाइड नोट मनीषा की ही लिखावट में हैं।
6. कीटनाशक जहर खरीदने पर सवाल
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पिता का दावा: मनीषा ने खुद ज़हर नहीं खरीदा।
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सीबीआई का जवाब: सिंघाणी स्थित 'देवेंद्र खाद बीज भंडार' के सीसीटीवी फुटेज और दुकानदार देवेंद्र कुमार के बयान से साफ है कि 11 अगस्त 2025 को मनीषा ने खुद 600 रुपये में 1 लीटर 'मोनो' पेस्टिसाइड खरीदा था। सुपर-स्पेशलिटी मेडिकल बोर्ड ने भी पुष्टि की है कि उसकी मौत 'मोनोक्रोटोफॉस' (ऑर्गेनोफॉस्फोरस) पीने से ही हुई थी।
7. कॉल डिटेल और मोबाइल फोन का टूटना
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पिता का दावा: घटना के बाद फोन की घंटी बजी थी और उसे साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा गया।
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सीबीआई का जवाब: सीडीआर (CDR) जांच के अनुसार मनीषा के फोन से अंतिम कॉल 11 अगस्त 2025 को दोपहर 2:29 बजे की गई थी। मोबाइल टूटने के पीछे किसी तीसरे व्यक्ति या बाहरी हमलावर की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
14 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम के दौरान शव में सड़न (Decomposition) के लक्षण थे, इसलिए नियमानुसार चिकित्सीय और प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई गई। अब सभी की निगाहें 14 अक्टूबर को होने वाली अदालती बहस पर टिकी हैं, जहां पिता के वकील और सीबीआई आमने-सामने होंगे।





