रैंकिंग के लिए सरकार ने छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें स्वच्छता, जीवन की गुणवत्ता, आत्मनिर्भरता, सतत पर्यावरण, सुशासन और नागरिक सुरक्षा शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों को लेकर 30 मानक तय किए गए हैं, और इन मानकों के आधार पर नगर निगमों को अंक दिए जाएंगे। रैंकिंग का उद्देश्य न केवल बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना है, बल्कि शहरवासियों के जीवन स्तर में सुधार करना और उनकी जीवनशैली को बेहतर बनाना भी है।
इन मानकों को इस तरह से निर्धारित किया गया है कि स्वच्छता को 24%, आत्मनिर्भरता को 25%, जीवन की गुणवत्ता को 18%, सतत पर्यावरण और सुशासन को 12%, और नागरिक सुरक्षा को 9% अंक दिए गए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रत्येक नगर निगम अपनी सेवाओं में सुधार लाए, इन मानकों पर रैंकिंग की जाएगी। यह प्रक्रिया इस साल के अंत तक पूरी होगी, और जुलाई-अगस्त 2025 में रैंकिंग का परिणाम घोषित किया जाएगा।
नगर निगमों की रैंकिंग के लिए खासतौर पर इन महत्वपूर्ण मानकों पर ध्यान दिया जाएगा: घरों में पेयजल कनेक्शन का सुनिश्चित होना, शहरों में पार्कों और हरियाली का प्रबंधन, नाइट शेल्टर की उपलब्धता, सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए किए गए कदम और जब्तीकरण अभियान, घर-घर कूड़ा उठाने की व्यवस्था, नियमित सफाई कार्य, आर्गेनिक कचरे का उचित निस्तारण, कचरा निस्तारण प्लांट पर कचरे का ढेर न होना, स्ट्रीट लाइट्स की स्थिति, जनसंख्या के हिसाब से सफाईकर्मियों की संख्या और सीवर कनेक्शन की स्थिति। इन पहलुओं पर नगर निगमों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, नगर निगमों द्वारा भेजे गए डाटा का सत्यापन मई और जून 2025 के बीच किया जाएगा। यह डाटा वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के आधार पर तैयार किया जाएगा। इस सत्यापन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी आंकड़े सही और वास्तविक हों, ताकि रैंकिंग प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो। इस प्रक्रिया के जरिए सरकार उम्मीद करती है कि नगर निगमों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और वे नागरिकों के लिए बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगे, जो अंततः प्रदेश की समग्र विकास प्रक्रिया में योगदान करेगा।
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