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रिपोर्ट्स • दिल्ली

विजयादशमी पर NSUI का रावण दहन, मोदी सरकार पर साधा निशाना

विजयादशमी पर NSUI ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रतीकात्मक रावण दहन कर वोट के अधिकार, महंगाई और सामाजिक असमानता के मुद्दे उठाए।

विजयादशमी पर NSUI का रावण दहन, मोदी सरकार पर साधा निशाना
फोटो: NSUI Protest | Ravan Dahan | Vote Rights | Gyanesh Kumar | Ankita Bhandari Case

नई दिल्ली में विजयादशमी के अवसर पर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ताओं ने एक प्रतीकात्मक रावण का दहन किया। पुतले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की तस्वीरें लगाई गई थीं। कार्यकर्ताओं ने इस प्रदर्शन के जरिए वोट काटने के आरोपों, महंगाई, पेपर लीक, राजनीतिक भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को उठाया।

प्रदर्शन के दौरान पुतले की नाभि पर उद्योगपति मुकेश अंबानी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें लगाई गई थीं। कार्यकर्ताओं ने इसे पूंजीपतियों और राजनीतिक सत्ता के कथित गठजोड़ का प्रतीक बताया। उनका आरोप था कि इस गठजोड़ के कारण आम जनता, गरीबों और वंचित समुदायों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

 

वोट के अधिकार और चुनाव आयोग पर सवाल

NSUI और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में 13 करोड़ से अधिक लोगों के वोट काटे गए हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब हर नागरिक को एक वोट का समान अधिकार प्राप्त है, तो मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया किस आधार पर की जा रही है।

कार्यकर्ताओं ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। हालांकि, वोट काटने से संबंधित आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस वीडियो में प्रस्तुत नहीं की गई है।

 

अंकिता भंडारी मामले और महिला सुरक्षा का मुद्दा

प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी की हत्या के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने दुष्यंत गौतम और पुष्कर सिंह धामी सरकार को लेकर सवाल उठाए तथा आरोप लगाया कि मामले में न्याय की मांग करने वालों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। ये आरोप प्रदर्शनकारियों के बयानों पर आधारित हैं। उन्होंने महिला सुरक्षा और कथित यौन उत्पीड़न के मामलों में जवाबदेही की मांग भी की।

 

अंबेडकर के संविधान और सामाजिक समानता का हवाला

कार्यकर्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को समान राजनीतिक अधिकार मिलना चाहिए। उनके अनुसार, वोट का अधिकार कमजोर हुआ तो गरीबों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ सकता है। उन्होंने पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और आर्थिक असमानता को भी मौजूदा व्यवस्था की प्रमुख समस्याएं बताया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी उंगलियों पर पट्टी बांधकर वोट के अधिकार को चोट पहुंचने का प्रतीकात्मक संदेश दिया। इसके बाद पुतले को आग लगाई गई। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही की मांग जारी रखेंगे।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/bO-DxifjLwQ?si=wjkHm70skmaqr3Pj

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