
लेकिन इन सबके बावजूद पूरे राज्य में हिंसा होती हुई दिखाई दी। चुनावी हिंसा में 6 जिलों में 15 लोगों के मरने की खबर है। मरने वालों में 8 TMC कार्यकर्ता, तीन CPI(M) कार्यकर्ता, कांग्रेस-भाजपा और ISF के एक-एक कार्यकर्ता और एक निर्दलीय उम्मीदवार का पोलिंग एजेंट शामिल है। 9 जून से अब तक हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 28 से ज्यादा हो चुकी है।

कूच बिहार के सीताई में बाराविटा प्राथमिक विद्यालय में मतदान केंद्र में तोड़फोड़ की गई और मतपत्रों में आग लगा दी गई। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए 2018 में भी ऐसे ही दृश्य देखने को मिले थे। मतदान के बीच TMC ने ट्वीट कर कहा, "आज हम जो अपार समर्थन देख रहे हैं वह लोगों के विश्वास का प्रमाण है.हम हमेशा चुनौतियों से ऊपर उठे हैं और अपने लोगों के लिए ऐसा करना जारी रखेंगे।”

वहीं BJP के आईटी सेल चीफ अमित मालवीय (Amit Malviya) ने बंगाल में जारी हिंसा को लेकर ट्वीट कर कहा, "दुखद है कि हम उस दिन मृतकों की गिनती कर रहे हैं जिस दिन पश्चिम बंगाल में पंचायतें चुनने के लिए वोट पड़ रहे हैं।”

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhary) ने कहा, "सत्तारूढ़ दल टीएमसी पुलिस प्रशासन और चुनाव आयोग ने बंगाल में आतंक का राज कायम कर दिया है।" उनका दावा है कि मरने वालों की संख्या 26 हो गई है और सैकड़ों लोग जो घायल हुए हैं अस्पताल में भर्ती हैं। बंगाल में राजनीतिक और चुनावी माहौल हिंसा से भरा हुआ है। यह लोकतंत्र का मखौल और पंचायत चुनावों का मखौल के अलावा और कुछ नहीं है। यह चुनावी लूट-खसोट का एक शानदार उदाहरण है।

हिंसा की घटनाओं को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने BJP के प्रदेश अध्यक्ष सुकान्त मजूमदार (Sukanta Mazumdar) से भी बात की और कार्यकर्ताओं के बारे में जानकारी ली। वहीं, नंदीग्राम से भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने कहा कि बंगाल जल रहा है, इसलिए केंद्र को यहां राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए।
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