
उत्तराखंड का एक जिला है उत्तरकाशी (Uttarkashi), यहां के पुरोला में हिन्दू-मुस्लिम के बीच विवाद गहराया हुआ है। विवाद के केंद्र में लव जिहाद और लैंड जिहाद (Love Jihad and Land Jihad) का मामला है। हालांकि इनकी प्रमाणिकता पर भी हमेशा सवाल उठते रहे हैं। पहले यह जानते हैं कि यह पूरा विवाद कहां से शुरु हुआ है। दरअसल उत्तरकाशी जिले के पुरोला कस्बे में एक मुस्लिम युवक उबैद और एक अन्य युवक जितेंद्र सैनी को एक नाबालिग हिन्दू लड़की के साथ पकड़ा गया था, फिर दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने दोनों युवकों को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपी में एक हिन्दू और दूसरा मुसलमान है लेकिन धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों को यह मौका मिल गया कि वे खुलकर उन्माद फैलाने की राजनीति कर सकें। इसलिए आरोपियों में सिर्फ मुस्लिम आरोपी को फ्रेम में रखकर लव जिहाद का मामला ज़ोर शोर से उठाया जा रहा है और उनके निशाने पर वहां रहने वाले मुस्लिम परिवार और दुकानदार हैं।
इस मामले में विभिन्न संगठनों ने मुस्लिम परिवारों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। पुरोला में मुस्लिमों की गारमेंट्स, फर्नीचर, फल, सब्ज़ी की दुकान चलाते हैं और मैकेनिक जैसे कामों को करते हैं। इस विवाद के बाद मुस्लिमों की दुकानों को निशाना बनाया गया। उनकी दुकानों के बाहर लगे बोर्ड और पोस्टर फाड़े गए और उनकी दुकानों पर कालिख पोती गई। इसके अलावा वहां पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें 15 जून का अल्टीमेटम दिया गया है कि "मुस्लिम परिवार पुरोला छोड़कर चले जाएं। इस पोस्टर को देवभूमि रक्षा अभियान की तरफ से लगाया गया है"

इन धमकियों के बाद वहां से लोग घर छोड़कर जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक मुस्लिम दुकानदार 42 साल से अपनी दुकान चला रहा था, जिसे अपनी दुकान को छोड़कर जाना पड़ा। वहीं एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तनाव की वजह से BJP के अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष मोहम्मद जाहिद (Mohammad Zahid) ने भी पुरोला छोड़ दिया है। इन रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जाहिद 25 साल से यही रह रहे थे और उन्होंने 3 साल पहले ही BJP ज्वॉइन किया था। इसके अलावा कई और नेताओं ने भी इलाके को छोड़ दिया है। लोगों का कहना है कि जब यहां सत्ताधारी दल के नेता सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर वे कैसे यहां रह सकते हैं।
बीबीसी (BBC) की एक रिपोर्ट में मुस्लिम दुकानदार के हवाले से बताया गया है कि मुस्लिम युवक उबेद खान के साथ अन्य दो युवक जितेंद्र सैनी और सोनू भी थे। उबेद और जितेंद्र का नाम मामले में लिखाया गया है, लेकिन स्थानीय निवासी सोनू का नाम रिपोर्ट में नहीं है। वहीं जन चौक (Jan Chowk) की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना के बाद से पुरोला में मुस्लिम समुदाय के लोगों की सभी दुकानें बंद हैं। कुछ दुकानदार अपना सामान समेट कर चले गये हैं, जबकि कुछ मुस्लिम परिवार डर और तनाव के बीच रह रहे हैं। इन परिवारों का पुरोला में अपना घर है और वे किसी भी हालत में अपने घर छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर भी इसके संदर्भ में लोग पोस्ट कर रहे हैं। फिल्ममेकर विनोद कापड़ी (Vinod Kapri)
ने लिखा कि- “आरोपी उवैद खान और जितेंद्र सोनी हैं, लेकिन उवैद खान के बहाने सारे मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है। उत्तराखंड में ये क्या हो रहा है।” वहीं वसीम अकरम त्यागी, जाकिर त्यागी, अशरफ हुसैन सहित पत्रकारों ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग दुकानों पर धावा बोल रहे हैं। यहां आपका ध्यान एक और घटना पर दिलाना चाहेंगे कि पुरोला कि घटना से पहले उत्तराखंड के रहने वाले एक BJP नेता ने अपनी बेटी की शादी एक मुस्लिम युवक से तय की थी। जैसे ही इस शादी के कार्ड वायरल हुए, लोगों ने विरोध जताना शुरु कर दिया, जिसके बाद शादी को रोकना पड़ा।
उत्तराखंड में इस विवाद के बीच एक फिर चर्चा लव जिहाद (Love Jihad) को तूल दिया जा रहा है। हालांकि इस घटना में लव जिहाद जैसा कुछ दिखाई प्रतीत नहीं हो रहा है, क्योंकि पुलिस ने इस घटना में दोनों समुदाय के आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं पुरोला की घटना पर सवाल पर पुलिस और प्रशासन भी उठ रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस की मौजूदगी में दुकानों पर धावा बोला जा रहा है, तो फिर पुलिस ऐसे अराजक तत्वों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? इसके अलावा 15 जून को बुलाई गई महापंचायत (Mahapanchayat) पर पुलिस ने क्या कोई कार्रवाई की है? सवाल तो यह भी उठ रहा है कि जब पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है तो फिर विवाद को क्यों तूल दिया जा रहा है? इन सवालों के बीच राज्य सरकार कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न है।
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