
जिस संजीव जीवा (Sanjeev Jeeva) को लखनऊ की कोर्ट में गोली मारी गई, वहीं ठीक सामने जज की कुर्सी थी, क्या यह जजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल नहीं है? संजीव जीवा को बीजेपी नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड (Brahmadutt Dwivedi Murder Case) में आजीवन कारवास की सजा मिली थी। वह पिछले बीस साल से जेल में बंद था। इसके अलावा उस पर दो दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं। वह लखनऊ कोर्ट (Lucknow Court) में हत्या और SC-ST Act के एक केस में पेशी पर लाया गया था, जैसे ही उसके केस की सुनवाई की बारी आई और वैसे ही कोर्ट रूम के भीतर वकील के भेष में बैठे हमलावर ने उस पर गोलियां दागनी शुरू दीं, गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच कोर्ट रूम और पूरे परिसर में भगदड़ मच गई, संजीव वही पर लहूलुहान होकर औंधे मुंह गिर गया।

यह मामला तो लखनऊ का है, ऐसे ही एक वारदात मेरठ में हुई। एक महिला वकील की उसके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। महिला ने अपनी हत्या की आशंका को लेकर पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस उसकी जान बचाती उससे पहले ही बदमाशों ने थाने के कुछ ही दूरी पर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।

यूपी सरकार के मंत्री दावा करते हैं कि राज्य अपराध मुक्त हो रहा है, तो इसकी भी सच्चाई जान लीजिए। NCRB के 2021 के आंकड़ों के अनुसार हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश नंबर वन है, "भारत में हत्या के 29,272 मामले दर्ज किए गए हैं। जिसमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 3,717 हत्या के मामले दर्ज किए गए। इसके बाद बिहार में 2,799 और महाराष्ट्र में 2,330 मामले दर्ज किए गए थे।"

यह आंकड़े कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। लेकिन यह सवाल पूछेगा कौन? जब मीडिया और पीआर प्रबंधन (PR Management) से सब कुछ Well and Good दिखाया जाएगा। तब कानून व्यवस्था की किसे परवाह होगी।
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