राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह बेरोजगारी के बढ़ते मामलों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिससे रोजगार के अवसर सृजित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे संसद में जनहित के मुद्दों को उठाते रहते हैं और सभी कार्यकर्ताओं को अपील की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभी से तैयार हो जाएं और गांव-गांव जाकर कांग्रेस की नीतियों को लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) की सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा के शासनकाल में बड़े और ताकतवर पूंजीपतियों को फंडिंग मिल रही है, लेकिन छोटे व्यापारियों को टैक्स के भार में दबा दिया गया है।
राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि वे भाजपा की नाकामी को लोगों तक पहुंचाएं और यह बताएं कि किस तरह से देश के भीतर महंगाई बढ़ी है, जिसका असर आम लोगों पर हो रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि सच्चाई के रास्ते पर चलने से कभी कोई भी उन्हें हरा नहीं सकता।
राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि वे जनता के बीच जाकर भाजपा की नीतियों का विरोध करें और कांग्रेस के साथ खड़े होने का विश्वास जताएं।
इसके बाद, राहुल गांधी ने देश के संविधान में दलितों के योगदान पर भी महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने डॉ. बी आर आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि आंबेडकर के पास सुविधाओं का अभाव था, लेकिन उन्होंने देश की राजनीतिक व्यवस्था को बदलने का काम किया। राहुल गांधी ने युवाओं से सवाल किया कि देश की बड़ी 500 कंपनियों में से कितनी कंपनियों के प्रमुख दलित हैं। जब एक छात्र ने कहा कि कोई भी नहीं, तो गांधी ने इससे असहमत होते हुए कहा कि आंबेडकर के पास कोई सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी उन्होंने देश की राजनीति को हिला दिया था।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की विचारधारा दलितों की है, और अगर इस देश में दलित नहीं होते, तो देश को संविधान नहीं मिलता।
राहुल गांधी ने यह माना कि दलितों के खिलाफ एक पूरी व्यवस्था काम कर रही है, जो उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करती है। वे यह मानते हैं कि इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई बहुत कठिन है, लेकिन अगर दलित एकजुट होते हैं, तो कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता।
राहुल गांधी ने इस दौरान 'मूल भारती' छात्रावास के दलित छात्रों से भी संवाद किया और उन्हें अपनी संघर्ष की कहानी साझा की। इस बैठक में कांग्रेस के अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा और पार्टी के अन्य नेता भी उपस्थित थे। राहुल गांधी का यह दौरा विशेष रूप से दलितों के अधिकारों और कांग्रेस पार्टी की नीतियों के बारे में जागरूकता फैलाने का एक अहम मौका था।
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