सीतापुर जेल में बंद सपा जिला अध्यक्ष अजय सागर के लेटरहेड पर लिखे इस पत्र में खान ने पार्टी से आग्रह किया है कि वे संसद में रामपुर के मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाएं, जैसा कि संभल के मामले में किया गया। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया कि इंडिया ब्लॉक रामपुर के पतन का मूक दर्शक बना हुआ है और वहां मुस्लिम नेतृत्व को समाप्त करने में उसकी भूमिका रही है।
आजम खान ने मुस्लिम लीडरशिप पर उठाए सवाल
खान ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि देश के सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, न ही उनके खिलाफ साजिश रची जा सकती है या सिर्फ सहानुभूति दिखाई जा सकती है। उन्होंने मांग की है कि इंडिया गठबंधन अपना रुख स्पष्ट करे और मुसलमानों की वर्तमान स्थिति और भविष्य पर गंभीरता से विचार करे।
सपा के रामपुर अध्यक्ष अजय सागर ने बताया कि वे आजम खान से जेल में मिलने गए थे और उनके कहने पर ही यह पत्र जारी किया। उन्होंने कहा, "पार्टी नेतृत्व ने मुझसे कोई संपर्क नहीं किया। खान साहब ने अपने दिल की बात कही और उनकी इच्छानुसार मैंने उसे सार्वजनिक कर दिया।"
क्यों अहम है आजम खान का पत्र?
इस पत्र को विशेष महत्व इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि आजम खान के सपा प्रमुख अखिलेश यादव से संबंध बिगड़े हुए माने जाते हैं। खान ने यह पत्र मोहिबुल्लाह नकवी को रामपुर लोकसभा सीट का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद लिखा है। नकवी, जो खान के कटु आलोचक हैं, ने 90,000 से अधिक मतों से जीत हासिल की। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 पर विजय प्राप्त की है।
सपा ने आजम खान को लेकर क्या कहा?
यूपी लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 सीटें जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। इससे पहले भी आजम खान ने सपा पर उन्हें जेल से छुड़ाने के लिए पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप लगाया था। सपा के राज्य नेतृत्व ने इस पत्र से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि खान एक वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी उनके साथ खड़े होने का हर संभव प्रयास कर रही है, जबकि पूर्व सपा सांसद एमटी हसन ने उनके बयान को व्यक्तिगत मामला बताया है।





