क्या है अनुच्छेद 326?
संविधान का अनुच्छेद 326 भारत में वयस्क मताधिकार की गारंटी देता है। इसके मुताबिक, हर भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का है और सामान्य रूप से किसी निर्वाचन क्षेत्र का निवासी है, उसे वोट देने का अधिकार है। हालांकि कुछ अपवाद भी हैं, जैसे मानसिक विक्षिप्तता, गंभीर अपराध, या भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्ति इस अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
यह प्रावधान भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करता है, ताकि हर पात्र नागरिक बिना भेदभाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
आयोग का X पोस्ट: क्या है सियासी संदेश?
चुनाव आयोग द्वारा अनुच्छेद 326 को साझा किया जाना, महज एक संवैधानिक जानकारी नहीं, बल्कि इसे एक साफ राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्ट विपक्षी दलों की उन आलोचनाओं का संविधान आधारित जवाब है, जो बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे हैं।
आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि वह केवल पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने और फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया में जुटा है, जो पूरी तरह संवैधानिक, पारदर्शी और वास्तविकता पर आधारित है।
बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले आयोग ने 25 जून से 26 जुलाई तक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया है। इस प्रक्रिया में करीब 7.89 करोड़ मतदाताओं के नामों की जांच की जा रही है और उन्हें गणना फॉर्म के ज़रिए अपने दस्तावेज़ जमा कराने हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मानसून और बाढ़ के इस मौसम में यह अभियान गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण इलाकों के कम पढ़े-लिखे लोगों के खिलाफ़ जाता है, जो दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं करा पाएंगे और इस कारण मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
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