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जब मनमोहन सिंह ने सुषमा स्वराज को शेर-ओ-शायरी में दिया जवाब

उनकी यह छवि बहुत कम लोगों को ज्ञात थी। उनके शायराना अंदाज की एक झलक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के साथ उनकी संवादात्मक शायरी में देखने को मिली थी।

जब मनमोहन सिंह ने सुषमा स्वराज को शेर-ओ-शायरी में दिया जवाब
फोटो: Manmohan Singh,Sushma Swaraj,
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार (26 दिसंबर) की रात निधन हो गया। देश को 1991 के आर्थिक संकट से उबारने वाले और पांच दशकों तक सेवा करने वाले मनमोहन सिंह न केवल एक प्रखर अर्थशास्त्री और कुशल प्रशासक थे, बल्कि उनकी शायरी में भी गहरी रुचि थी। हालांकि, उनकी यह छवि बहुत कम लोगों को ज्ञात थी। उनके शायराना अंदाज की एक झलक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के साथ उनकी संवादात्मक शायरी में देखने को मिली थी। यह ऐतिहासिक पल आज उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मनमोहन-सुषमा के बीच शायरी की जुगलबंदी


साल 2011 की घटना है, जब सदन में विकीलीक्स को लेकर चर्चा हो रही थी। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने शेर-ओ-शायरी के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने शहाब जाफरी की पंक्तियों का सहारा लेते हुए कहा:

“तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता काफिला क्यों लुटा, 
हमें रहजनों से गिला नहीं है, तेरी रहबरी का सवाल है।”

इस शायराना हमले का जवाब मनमोहन सिंह ने भी उसी अंदाज में देते हुए दिया। उन्होंने अल्लामा इकबाल का एक शेर पढ़ा:

“माना कि तेरी दीद के काबिल नहीं हूं मैं, 
तू मेरा शौक देख, मेरा इंतजार देख।”

मनमोहन सिंह के इस अप्रत्याशित जवाब ने न केवल सुषमा स्वराज को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया, बल्कि पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। यह पल उनकी विनम्रता और शायराना अंदाज का प्रतीक बन गया।

आजाद भारत की दो महान हस्तियों का न होना


सुषमा स्वराज का निधन साल 2019 में हुआ, और अब डॉ. मनमोहन सिंह भी हमारे बीच नहीं रहे। दोनों नेताओं के बीच शायराना संवाद की ये घटनाएं  आज भी भारतीय राजनीति के एक अद्भुत और यादगार पहलू के रूप में दर्ज हैं। यह हमें न केवल उनकी व्यक्तित्व की गहराई दिखाती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि राजनीति में संवाद का यह संवेदनशील और साहित्यिक पहलू कितना महत्वपूर्ण है।

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