राज ठाकरे भी बीते महीनों में कई बार मराठी एकता की बात कह चुके हैं। अप्रैल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था,
"महाराष्ट्र के अस्तित्व के सामने छोटे-मोटे झगड़े कोई मायने नहीं रखते। साथ आना मुश्किल नहीं, बस इच्छा होनी चाहिए।"
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि "जो महाराष्ट्र के हित के खिलाफ होगा, उसे घर बुलाकर खाना नहीं खिलाया जाएगा।" इससे पहले उद्धव ठाकरे भी कह चुके हैं कि मराठी एकता और महाराष्ट्र के व्यापक हितों के लिए वे निरर्थक झगड़े खत्म करने को तैयार हैं। उन्होंने सभी मराठीभाषियों से एकजुट होने की अपील की थी।
इन राजनीतिक संकेतों के बीच, राज्य में आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), पुणे, ठाणे समेत कई नगर निकायों के चुनावों की तैयारी जोरों पर है। बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट), शिवसेना (UBT), MNS और एनसीपी सभी ने चुनावी मोर्चा मजबूत करने की रणनीति शुरू कर दी है। ऐसे में ठाकरे बंधुओं की संभावित एकजुटता राज्य की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है।





