उन्होंने कहा,
"रेल परियोजनाओं के ख्वाब बहुत लोगों ने देखे, अंग्रेजों ने भी यह सपना देखा था, लेकिन पूरा नहीं कर सके। जो काम अंग्रेज नहीं कर पाए, वो आपके हाथों आज पूरा हुआ है। आपने कश्मीर की वादियों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ दिया है।"
उमर अब्दुल्ला ने भावुक अंदाज़ में कहा कि अंग्रेजों का सपना था कि वे झेलम के किनारे रेल लाकर कश्मीर को देश से जोड़ें, लेकिन अब वह सपना साकार हो चुका है। उन्होंने इसे ‘किस्मत’ और ‘मुकद्दर’ बताते हुए कहा कि जब-जब रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट हुए, उन्हें उसमें शामिल होने का अवसर मिला है।
अपने भाषण में उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और उसकी पुनर्स्थापना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में कटरा रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के वक्त वे एक राज्य के मुख्यमंत्री थे, लेकिन अब एक केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मंच साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा,
"हमें पता भी नहीं चलेगा और चीज़ें सामान्य हो जाएंगी, और एक दिन पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दे देंगे।"
उमर ने यह भी कहा कि वे कभी भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर नीति को नहीं भूल सकते, जो संवाद और विकास के मूल सिद्धांतों पर आधारित थी।





