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मणिपुर के सांसद आर्थर ने जो कहा वह मणिपुर के हजारों लोगों की दिल की आवाज़ है - चिदंबरम

आर्थर ने बड़ा सवाल पूछते हुए कहा कि बीजेपी कहती रहती है, ‘मोदी है तो मुमक़िन हैं’ लेकिन क्या पीएम मोदी मणिपुर को न्याय दिला पायेंगे?

मणिपुर के सांसद आर्थर ने जो कहा वह मणिपुर के हजारों लोगों की दिल की आवाज़ है - चिदंबरम
फोटो: मणिपुर के सांसद आर्थर ने जो कहा वह मणिपुर के हजारों लोगों की दिल की आवाज़ है - चिदंबरम
कांग्रेस से राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने लोगों से अपील की कि सभी मणिपुर से लोकसभा सांसद और कांग्रेस नेता अल्फ्रेड आर्थर का भाषण जरूर सुनें। बुधवार को चिदंबरम ने कहा कि आर्थर ने मणिपुर से जुड़ी झूठी खबरों को ख़ारिज कर राज्य की असली तस्वीर को लोगों के सामने रखा है। 30 जुलाई को दिए अपने भाषण में आर्थर ने देश के प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की विशेष रूप से आलोचना की थी। सांसद ने जो कुछ भी संसद में कहा वह मणिपुर के हजारों लोगों की दिल से निकली हुई आवाज़ है। 

दरअसल, आर्थर केंद्रीय बजट पर अपना भाषण देते हुए भावुक थे। उन्होंने कहा कि क्या मणिपुर भारत का भाग नहीं है जो पीएम मोदी आज तक मणिपुर के हालात देखने के लिए नहीं आये?  क्या कारण है कि राज्य में 3 मई को शुरू हुई हिंसा के बाद एक भी केंद्रीय मंत्री मणिपुर का दौरा करने नहीं आया? राज्य में बीजेपी की सरकार है, मुख्यमंत्री बिरेन सिंह रोज लोगों को उकसाने वाले बयान देते हैं। मणिपुर के लोगों के पास खाने के लिए राशन नहीं है, राज्य में 15 महीनों से शरणार्थियों की तरह टेंट में या शरणार्थी गृह में रह रहे हैं। आखिर कहां गया पीएम मोदी के 56 इंच का सीना?

कांग्रेस सांसद आर्थर ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वह एक बार मणिपुर का दौरा करने के लिए जरूर आयें, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी राज्य का तीन बार दौरा कर चुके हैं। क्या पीएम मोदी में इतना साहस नहीं है कि वह उन महिलाओं और बच्चों की चीख पुकार सुन सके, जो 15 महीनों से अपने घर नहीं लौट सके है। मई 2023 में शुरू हुई मणिपुर की हिंसा ने राज्य में गहरे विभाजन को जन्म दिया है। हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं, और दयनीय स्थिति में रह रहे हैं। राज्य के लोगों की परिस्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। 50 हज़ार से ज़्यादा लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। मणिपुर के लोगों का कहना है कि मणिपुर में जो हुआ, उसके लिए मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ज़िम्मेदार हैं। इसके बाद भी अभी तक मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने इस्तीफ़ा नहीं दिया।

बिरेन सिंह ने कहा, “हमने 10 वर्षों से आपकी 'मन की बात' सुनी है। क्या आप उन महिलाओं और बच्चों की चीखें नहीं सुन सकते, जो अपने घर वापस नहीं जा सकते?” उन्होंने कहा कि राज्य में यह स्थिति है की एक क्षेत्र के लोग दूसरे क्षेत्र में नहीं जा सकते हैं। इंफाल घाटी के लोग मणिपुर के दूसरे इलाकों में नहीं जा सकते हैं। चिदंबरम ने कहा कि यदि केंद्र की मोदी सरकार मणिपुर के लोगों की पुकार को नहीं सुनती है, और राज्य में हालात ठीक नहीं करती है, तो इसके लिए पूर्वोत्तर के राज्य उन्हें दंडित करेंगे।


केंद्रीय बजट ‘जनविरोधी’ है


आर्थर ने केंद्रीय बजट को जनविरोधी क़रार दिया है। आर्थर ने कहा कि मणिपुर भयानक हिंसा का सामना कर रहा है, पिछले 35 वर्षों से मणिपुर सबसे ज़्यादा भीषण बाढ़ को सामना करने वाला राज्य है, फिर भी बजट में राज्य के लिए कुछ नहीं किया गया है। आम लोगों के लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है, इसके बाद भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मुस्कुराते हुए बजट पेश करती है।आर्थर ने बड़ा सवाल पूछते हुए कहा कि बीजेपी कहती रहती है, ‘मोदी है तो मुमक़िन हैं’ लेकिन क्या पीएम मोदी मणिपुर को न्याय दिला पायेंगे?