धर्म चुनावी मुद्दा बनेगा? भाजपा की रणनीति पर सवाल
स्थानीय भाजपा नेता सुरेश शॉ, जिन्होंने कथित रूप से ये पोस्टर लगवाए हैं, ने इसे बंगाल में बढ़ती 'जिहादी गतिविधियों' और मूर्तियों के अपमान की घटनाओं से जोड़ा। उन्होंने कहा,
"बंगाल में जिहादी ताकतों का प्रभाव बढ़ रहा है और हाल के दिनों में कई धार्मिक प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया है। हिंदुओं को एकजुट करने के लिए ऐसे नारे लगाए गए हैं।"
हालांकि, भाजपा उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी ने इस मुद्दे पर पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा का इन पोस्टरों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इसे महाकुंभ के बाद देश में बढ़ी ‘हिंदुत्व की लहर’ का असर बताया। मगर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण की रणनीति अपना सकती है, जैसा कि पहले भी देखा गया है।
भाजपा के इस कदम का जवाब देते हुए टीएमसी ने भी पोस्टर लगाकर पलटवार किया। टीएमसी के पोस्टरों में भाजपा के नारे को ही आधार बनाकर लिखा गया—
"हिंदू हिंदू भाई भाई, लेकिन हमारा पूरा मंत्री कहां है?"
"हिंदू हिंदू भाई भाई, गैस की सब्सिडी कहां है?"टीएमसी ने महंगाई, बेरोजगारी और केंद्र सरकार की नीतियों को मुद्दा बनाते हुए भाजपा की रणनीति को जनता को गुमराह करने वाला बताया।
ममता बनर्जी पर भाजपा का वार, टीएमसी ने दिया जवाब
भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इफ्तार पार्टियों में शामिल होने और फुरफुरा शरीफ दरगाह जाने को लेकर हमला बोला। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं।
इस पर ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा,
"मैं सभी धर्मों का सम्मान करती हूं और हर धार्मिक स्थल पर जाती हूं। बंगाल हमेशा से धर्मनिरपेक्ष राज्य रहा है, और इसे किसी पार्टी के एजेंडे से बांटा नहीं जा सकता।" टीएमसी नेता शोभनदेव चटर्जी ने भाजपा की इस रणनीति को विफल करार देते हुए कहा,
"भाजपा ने 2021 में भी कई हथकंडे अपनाए, लेकिन बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया। इस बार वे धर्म का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि बंगाल के लोग सांप्रदायिक राजनीति को पसंद नहीं करते।"
राज्य में मुस्लिम आबादी 30% से अधिक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का चुनाव भाजपा और टीएमसी के बीच ‘धर्मयुद्ध’ का रूप ले सकता है, जहां एक ओर भाजपा हिंदुत्व को केंद्र में रखेगी, तो दूसरी ओर टीएमसी विकास और धर्मनिरपेक्षता को अपना मुख्य मुद्दा बनाएगी।
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