रामगोपाल यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की मुख्य रणनीति यह है कि वह माहौल को खराब करके राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुसलमानों की संपत्ति को वक्फ बोर्ड के माध्यम से छीनने के आरोप सही हैं। उनका कहना था कि यह सिर्फ डर नहीं है, बल्कि यह हकीकत है कि सरकार ने मुसलमानों की संपत्तियां हड़पने की कोशिशें तेज कर दी हैं। "मुसलमानों को अपनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर डर होना स्वाभाविक है। यह डर गलत नहीं है, क्योंकि उनका शारीरिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे को हल नहीं करती है, तो इसके परिणाम देश की एकता और शांति के लिए बेहद नकारात्मक हो सकते हैं।
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भी इस बिल का विरोध करते हुए कहा, "हमने पहले ही जेपीसी में इस बिल को लेकर अपनी सभी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन्हें अनदेखा कर दिया गया। अब हम संसद में भी इसे लेकर पुरजोर विरोध करेंगे। यह बिल देश के लोकतांत्रिक ढांचे और धर्मनिरपेक्षता को चुनौती देने वाला है।"
इसके साथ ही, शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार इस बिल को पारित करने में सफल नहीं होगी। प्रियंका ने यह दावा किया कि "टीडीपी, जेडीयू और चिराग पासवान की पार्टियां इस बिल का समर्थन नहीं करेंगी। इन दलों का रवैया साफ है, वे इस बिल के खिलाफ हैं और भाजपा के पास अब बहुमत नहीं है, इसलिए वे इसे पारित नहीं कर पाएंगे।"
प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि इस बिल के जरिए सरकार जनता का ध्यान एक अहम मुद्दे से भटकाना चाहती है। उनका मानना है कि सरकार इस समय एक ऐसे कानून को संसद में लाकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा खड़ा करना चाहती है, ताकि देश के कारोबार और अन्य संकटों की ओर से लोगों का ध्यान हट सके। उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ लागू हो सकता है, जिससे भारतीय कारोबार को भारी नुकसान होगा।
फार्मा सेक्टर सहित कई उद्योगों ने सरकार से अपील की है कि वह इस मसले पर अमेरिका से बातचीत करे।"
प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ प्रचार में लगी हुई है और यह बार-बार यह दावा करती है कि इस सप्ताह बिल संसद में पेश किया जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक इस बिल को संसद में पेश नहीं किया गया है। "कई महीनों से यह हो रहा है कि किरेन रिजिजू मीडिया से यह कहते हैं कि इस सप्ताह बिल आएगा, लेकिन यह अब तक संसद में नहीं आया। इसका मतलब यह है कि भाजपा केवल प्रचार में लगी हुई है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है," प्रियंका ने कहा।
इस प्रकार, विपक्षी दलों का यह मानना है कि यह बिल न केवल मुसलमानों के अधिकारों का उल्लंघन करेगा, बल्कि यह देश में सांप्रदायिक तनाव और असहमति को भी बढ़ावा देगा। इसके खिलाफ एकजुट विपक्ष का यह कहना है कि सरकार के इस कदम से देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को खतरा होगा, और अगर यह बिल पास होता है, तो इसका असर भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर पड़ेगा।
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