21 जून को दांदरपुर गांव में कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत कुमार यादव के साथ दुर्व्यवहार हुआ था। आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से अपनी जाति छिपाकर कथा का आयोजन किया और एक महिला से छेड़खानी की। इसके बाद कथित तौर पर गांव के कुछ ब्राह्मण युवकों ने उनके साथ मारपीट की और संत कुमार का सिर भी मुंडवा दिया।
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने 23 जून को चार ब्राह्मण युवकों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके जवाब में कथावाचक पक्ष ने भी मुकदमा दर्ज कराया। घटना ने जातीय तनाव को जन्म दिया और मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेने लगा।
गगन यादव के नेतृत्व में ‘अहीर रेजिमेंट’ के समर्थक गांव की ओर कूच कर रहे थे। पुलिस पहले से ही गांव के बाहर तैनात थी। जब भीड़ को रोका गया तो उनमें से कुछ उग्र हो गए और पथराव शुरू कर दिया। कुछ उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
हालात बिगड़ते देख पुलिस को आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग करनी पड़ी। शुरू में पुलिस को पीछे हटना पड़ा, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के पहुंचने के बाद हालात पर काबू पा लिया गया। कई उपद्रवियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि अन्य की पहचान वीडियो फुटेज के ज़रिए की जा रही है।
एसपी ग्रामीण श्रीशचंद्र ने बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने तुरंत स्थिति नियंत्रण में ले ली। दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया गया है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा और कथावाचकों को सम्मानित कर समर्थन जताया था। वहीं, पूरे मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा छेड़ दी है।





