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Uttrakhand: UCC के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, क़ानून को महिलाओं और समाज के खिलाफ बताया।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद से इसे लेकर लगातार जनहित याचिकाओं का सिलसिला हाईकोर्ट में जारी है। हाल ही में उत्तराखंड |

Uttrakhand: UCC के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, क़ानून को महिलाओं और समाज के खिलाफ बताया।
फोटो: High Court against UCC
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद से इसे लेकर लगातार जनहित याचिकाओं का सिलसिला हाईकोर्ट में जारी है। हाल ही में उत्तराखंड महिला मंच की डॉ. उमा भट्ट, कमला पंत और समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार ने यूसीसी अधिनियम और इसके नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दायर की है। इस मामले में गुरुवार को सुनवाई होने की संभावना है। 

 याचिकाकर्ताओं ने यूसीसी को पूरी तरह से जनविरोधी, असंवैधानिक और निजता का उल्लंघन करने वाला करार देते हुए तर्क दिया है कि इस कानून से महिलाओं के खिलाफ भेदभाव बढ़ेगा और समाज में हिंसा, असमानता तथा अनियंत्रित असहमति को बढ़ावा मिलेगा। उनका यह भी कहना है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन करता है, जो समानता, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करते हैं।

 इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यूसीसी के लागू होने से युवाओं को अपने जीवनसाथी को चुनने का अधिकार छीन लिया जाएगा। अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़े हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि यूसीसी के तहत पुलिस और रजिस्ट्रार को असीमित जांच शक्तियां प्रदान करने से यह कानून जनता के उत्पीड़न का कारण बन सकता है। साथ ही, विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और वसीयत जैसे संवेदनशील मामलों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे यह साबित होता है कि नागरिकों की निजता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इन चिंताओं के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस अधिनियम के खिलाफ फैसला लेने का अनुरोध किया है।

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