इसके अलावा, अंसल के निदेशक प्रणव अंसल, विकास यादव, महाप्रबंधक अमित शुक्ला और अन्य के खिलाफ गाजियाबाद देहात के डूंडाहेडा थाने में भी एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि अंसल इन्फ्रास्ट्रक्चर की मूल अनुमोदित योजना के तहत 1765 एकड़ भूमि का स्वीकृति मिली थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 3530 एकड़ कर दिया गया। 2010 में पहली बार भूमि विस्तार की स्वीकृति दी गई, फिर 2013 में एक और विस्तार का अनुमोदन किया गया। हालांकि, इन अनुमोदनों के बावजूद विकासकर्मियों ने जरूरी सुविधाओं के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं किया और नियमानुसार भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज भी पेश नहीं किए। इसके चलते परियोजना का लेआउट आज तक स्वीकृत नहीं हो सका है।
यह मामला और भी गंभीर हो गया है क्योंकि अंसल समूह को एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) द्वारा दिवालिया घोषित किया जा चुका है, जिसके कारण निवेशकों को अपनी जमा पूंजी की चिंता सताने लगी है।
लखनऊ में कई निवेशक दशकों से अपनी राशि अंसल ग्रुप में फंसी हुई महसूस कर रहे हैं। इन निवेशकों ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन भी किए और विभिन्न मंचों पर अपनी समस्याओं को उठाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया और विधानसभा में मंगलवार को घोषणा की कि सरकार धोखाधड़ी के शिकार लोगों की मदद करेगी और दोषियों को सजा दिलवाएगी।
इस मुद्दे ने राज्य सरकार की ओर से निवेशकों के हित में कार्रवाई करने का स्पष्ट संदेश दिया है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार आगे क्या कदम उठाती है और किस तरह से इस मामले की जांच को गति देती है।
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