उन्होंने रमजान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दौरान मुस्लिम दिनभर उपवास रखते हैं, खुदा की इबादत करते हैं और शाम को परिवार व दोस्तों के साथ मिलकर इफ्तार करते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि "हम पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं और इसके लिए प्रयासरत हैं।"
मुस्लिम समुदाय की नाराजगी क्यों?
हालांकि, इस इफ्तार डिनर को लेकर अमेरिकी मुस्लिम समुदाय ने कड़ा विरोध जताया। आरोप है कि व्हाइट हाउस में आयोजित इस इफ्तार पार्टी में अमेरिकी मुस्लिम नेताओं और सांसदों को न्योता नहीं दिया गया। इसके बजाय, केवल मुस्लिम देशों के राजदूतों और विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।
व्हाइट हाउस के बाहर कई मुस्लिम सिविल राइट्स ग्रुप्स ने "Not Trump's Iftar" नाम से विरोध प्रदर्शन किया। एक प्रदर्शनकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा, "यह ट्रंप का पाखंड है। एक तरफ वह अमेरिका में मुस्लिमों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करते हैं, तो दूसरी ओर इफ्तार पार्टी का आयोजन कर दिखावा करते हैं।"
यह विवाद इसलिए भी गहरा गया क्योंकि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान, 2017 में व्हाइट हाउस की पारंपरिक इफ्तार पार्टी को रद्द कर दिया था। जबकि, यह परंपरा 1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा शुरू की गई थी, जिसे जॉर्ज बुश और बराक ओबामा ने भी जारी रखा था।
परंपरागत रूप से इस इफ्तार डिनर में अमेरिकी मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्य, मुस्लिम देशों के राजनयिक और सीनेटर शामिल होते रहे हैं। लेकिन इस बार अमेरिकी मुस्लिम समुदाय को इससे अलग रखे जाने पर विवाद और गहरा गया है।
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