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संभल हिंसा मामले में संसद में हंगामा, अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा; रामगोपाल बोले - जजों पर हो कार्रवाई

राम गोपाल यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "सर्वे के जरिए पूरे देश में जानबूझकर अशांति और भय का माहौल पैदा करने की साजिश की जा रही है।

संभल हिंसा मामले में संसद में हंगामा, अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा; रामगोपाल बोले - जजों पर हो कार्रवाई
फोटो: संभल हिंसा मामले में संसद में हंगामा, अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा; रामगोपाल बोले - जजों पर हो कार्रवाई
संभल हिंसा को लेकर मंगलवार को संसद में एक बार फिर भारी हंगामा और नारेबाजी का माहौल बना। गरमागरम बहस के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में यूपी सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए अधिकारियों की मनमानी कार्रवाई और दमनकारी रवैये की कड़ी आलोचना की। इस विवादास्पद मुद्दे पर सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट से विशेष अपील की कि इस तरह के विवादास्पद सर्वे का आदेश देने वाले न्यायाधीशों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आक्रामक लहजे में कहा, "सदन के पहले दिन से ही हमारी पार्टी ने संभल पर चर्चा की मांग की है और हम अपनी इस मांग पर अडिग हैं। हमारी स्पष्ट मांग है कि सदन में संभल मामले पर विस्तृत चर्चा हो। हम अपनी बात पूरी ताकत के साथ रखना चाहते हैं। यहां के अधिकारी बेलगाम होकर मनमानी कर रहे हैं और यह सब वहां की सरकार के इशारे पर किया जा रहा है। प्रशासन का यह रवैया अभूतपूर्व और चिंताजनक है। हम जोर देकर मांग करते हैं कि वहां के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। जो लोग जगह-जगह 'खोद देना' (सर्वे करना) की साजिश रच रहे हैं, वे देश के सामाजिक ताने-बाने और सौहार्द को नष्ट कर देंगे। यह भाजपा की एक सोची-समझी कुटिल रणनीति है, जिसके तहत वे देश भर में इस तरह की विघटनकारी गतिविधियां कर रही है।"

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "सर्वे के जरिए पूरे देश में जानबूझकर अशांति और भय का माहौल पैदा करने की साजिश की जा रही है। यह देश की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है। हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट को तत्काल इसके खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा नोटिस जारी करना चाहिए और इस तरह के विवादास्पद सर्वे का आदेश देने वाले न्यायाधीशों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।"