पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
साल 2023 में भी ईडी ने विनय शंकर तिवारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। उस वक्त गोरखपुर स्थित उनके आवास और अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर 72 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को जब्त किया गया था। लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय ने गोरखपुर, महराजगंज और लखनऊ में फैली कुल 27 संपत्तियों को जब्त करने की पुष्टि की थी।
विनय शंकर तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने बसपा में रहते हुए गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड के जरिए विभिन्न बैंकों से लोन लिया और उसका दुरुपयोग किया। बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में बने कंसोर्टियम की शिकायत पर पहले सीबीआई ने जांच शुरू की थी। आरोप है कि इस कंपनी ने कुल 1129.44 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। अब उसी मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत यह ताजा छापेमारी की है।
हरिशंकर तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत में लंबे समय तक चर्चा में रहा है। कहा जाता है कि 1985 में जेल से ही विधानसभा चुनाव जीतकर वे विधायक बने थे। इसके बाद वे 2007 तक लगातार चिल्लूपार सीट से विधायक रहे और प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। पूर्वांचल की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
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