हालांकि, इस सियासी उथल-पुथल के बीच शिंदे की सेहत ने भी साथ नहीं दिया, जिसने अटकलों के बाजार को और भी गरम कर दिया है। मंगलवार को वे ठाणे के एक अस्पताल में भर्ती हुए, जहां डॉक्टरों ने उनका चेकअप किया और बाद में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और हवा दे दी है।
इस बीच एक बड़ा खुलासा करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बम फोड़ा है कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद न मिलने से बेहद नाराज हैं। आठवले ने एक दिलचस्प प्रस्ताव भी रखा है कि शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, जो इस राजनीतिक पहेली को एक नया मोड़ दे सकता है।
रामदास आठवले ने आगे कहा, "मेरा सुझाव है कि जैसे देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे की सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया था, वैसे ही इस बार शिंदे को यह जिम्मेदारी स्वीकार कर लेनी चाहिए। यदि वह यह पद संभालने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उन्हें या तो महायुति का अध्यक्ष बनना चाहिए या फिर केंद्र सरकार का हिस्सा बन सकते हैं।" आठवले ने कहा कि शिंदे मुख्यमंत्री न बनाए जाने से काफी नाराज और निराश हैं। उनके समर्थकों में भी इस फैसले को लेकर असंतोष की भावना देखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि चूंकि उनके पास 132 सीटें हैं, जो बहुमत के बेहद करीब है, इसलिए इस बार मुख्यमंत्री का पद उनके पास ही रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती है।





