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परिसीमन को लेकर पंजाब कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी, हरियाणा के साथ बराबरी पर उठाए सवाल

बाजवा ने स्पष्ट रूप से कहा, अगर परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो पंजाब जैसे राज्यों के साथ अन्याय होगा। हमें एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा।

परिसीमन को लेकर पंजाब कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी, हरियाणा के साथ बराबरी पर उठाए सवाल
फोटो: परिसीमन को लेकर पंजाब कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी, हरियाणा के साथ बराबरी पर उठाए सवाल
दक्षिण  भारत में जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों के परिसीमन की संभावनाओं के बीच, अब इस मुद्दे को लेकर पंजाब में भी राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पंजाब के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से पंजाब के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य के सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें परिसीमन के पक्ष और विपक्ष पर मिलकर चर्चा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए। बाजवा ने स्पष्ट रूप से कहा, "अगर परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो पंजाब जैसे राज्यों के साथ अन्याय होगा। हमें एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा।"

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी जताई चिंता


बाजवा से पहले, चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी जनसंख्या आधारित परिसीमन पर गहरी चिंता व्यक्त की। तिवारी ने कहा कि यदि "एक नागरिक, एक वोट और एक मूल्य" के मौजूदा सिद्धांत के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो उत्तर भारत के राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाएगा। तिवारी के अनुसार, मौजूदा परिसीमन के बाद पंजाब और हरियाणा दोनों की लोकसभा सीटों की संख्या घटकर 18 हो सकती है, लेकिन संसद की कुल ताकत में इनका प्रतिशत घट जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों का राष्ट्रीय राजनीति में महत्व और अधिक सीमित हो जाएगा। तिवारी ने यह भी कहा कि, "अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होता है तो हरियाणा और पंजाब के बीच तनाव बढ़ सकता है। पंजाब के लोग कभी भी यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हरियाणा के बराबर उनकी सीटें हो जाएं।" उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर नए मानदंड तैयार किए जाएं ताकि छोटे राज्यों के साथ अन्याय न हो।

हरियाणा में कांग्रेस का मिला-जुला रुख


पंजाब में जहां कांग्रेस पूरी तरह से जनसंख्या आधारित परिसीमन के विरोध में है, वहीं पड़ोसी राज्य हरियाणा में कांग्रेस का रुख अभी तक नरम दिखाई दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, इसलिए इस पर अभी से प्रतिक्रिया देना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, "यह मुद्दा पहले संसद में पेश किया जाएगा और फिर परिसीमन आयोग का गठन होगा। इसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जा सकेगा।" 

हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भान ने भी इस मुद्दे पर संयम बरतने का सुझाव देते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने से पहले केंद्र सरकार को "सर्वदलीय बैठक" बुलाकर सभी दलों को विश्वास में लेना चाहिए। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक संपत सिंह ने सुझाव दिया कि परिसीमन में केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या घनत्व और स्थानीय परिस्थितियों जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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