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कोर्ट के सामने नहीं चली ट्रंप की, अप्रवासियों को अल सल्वाडोर में निर्वासित करने के आदेश पर लगी रोक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सैकड़ों अप्रवासियों को अल सल्वाडोर में निर्वासित करने का निर्णय लिया, जबकि ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई |

कोर्ट के सामने नहीं चली ट्रंप की, अप्रवासियों को अल सल्वाडोर में निर्वासित करने के आदेश पर लगी रोक
फोटो: कोर्ट के सामने नहीं चली ट्रंप की, अप्रवासियों को अल सल्वाडोर में निर्वासित करने के आदेश पर लगी रोक
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सैकड़ों अप्रवासियों को अल सल्वाडोर में निर्वासित करने का निर्णय लिया, जबकि ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई के बीच एक अमेरिकी संघीय अदालत के जज ने विदेशी दुश्मन कानून अधिनियम के तहत निर्वासन पर अस्थाई रोक लगाने का आदेश जारी किया था। यह कदम अदालत के फैसले के ठीक बाद उठाया गया, और इसे लेकर विवाद पैदा हो गया है। प्रशासन के अधिकारियों ने इसका बचाव करते हुए कहा कि अदालत ने जो आदेश दिया, वह उस समय तक प्रभावी नहीं हो सकता था, जब तक कि विमानों की उड़ान भरने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। उनका कहना था कि अदालत का आदेश सुनाए जाने तक ये विमान पहले ही उड़ चुके थे और इस कारण प्रशासन ने इसे पालन करने में असमर्थता दिखाई।

 रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज जेम्स ई. बोसबर्ग ने शनिवार को निर्वासन पर अस्थाई रूप से रोक लगाने का आदेश दिया था। ट्रंप प्रशासन के वकीलों ने जज को बताया कि दो विमान पहले ही उड़ चुके हैं, एक अल सल्वाडोर के लिए और दूसरा होंडुरास के लिए। विमान की उड़ान भरने के बाद जज ने मौखिक रूप से प्रशासन को आदेश दिया कि इन विमानों को वापस लाया जाए, क्योंकि उनका निष्कासन अदालत के आदेश के खिलाफ था। हालांकि, जैसे ही यह जानकारी मिली कि विमान पहले ही अपने गंतव्य स्थानों तक पहुंच चुके हैं, यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासन ने जज के मौखिक आदेश का पालन नहीं किया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस मामले पर प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि प्रशासन ने अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने अदालत के आदेश का पालन करने से इंकार नहीं किया है, लेकिन उनका यह भी मानना था कि इस आदेश का कोई कानूनी आधार नहीं था। उनका तर्क था कि जब अदालत ने अपना आदेश सुनाया, तब विमानों की उड़ान पहले ही पूरी हो चुकी थी, और प्रशासन को तब तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ था। 

 इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय काफी विविध रही। जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के कानून प्रोफेसर स्टीव व्लाडेक ने कहा कि जज बोसबर्ग ने जो आदेश जारी किया था, उसमें विमानों को वापस लाने का उल्लेख नहीं था, हालांकि उन्होंने यह मौखिक रूप से जरूर कहा था। उन्होंने इस स्थिति को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया और कहा कि ट्रंप प्रशासन कानूनी रूप से अपनी कार्रवाई को सही ठहरा सकता है, लेकिन यह तो निश्चित है कि प्रशासन ने जज के आदेश की भावना का उल्लंघन किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद अदालतों को अपने आदेशों में अधिक स्पष्टता सुनिश्चित करनी होगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति से बचा जा सके। व्लाडेक ने आगे कहा कि इस घटना का परिणाम यह हो सकता है कि अदालतें अब अपने आदेशों को और अधिक सटीक और स्पष्ट रूप से जारी करेंगी। 

इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में सरकार को किसी भी प्रकार की छूट देने से पहले अदालतें सोच-समझकर फैसला लेंगी। उनके अनुसार, यह मामला कोर्ट के निर्णयों में और अधिक कड़े निर्देश देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, ताकि प्रशासन को कोई कानूनी आंशका उत्पन्न न हो। अंततः, इस विवादित कदम को लेकर ट्रंप प्रशासन और न्यायपालिका के बीच स्पष्ट मतभेद दिखाई दे रहे हैं, जो भविष्य में और अधिक कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकते हैं।

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