रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना की पहल ट्रंप ने जनवरी में की थी। इसका उद्देश्य है उपग्रहों का एक विशाल नेटवर्क तैयार करना, जो संभावित मिसाइल हमलों का पता लगा सके, उनकी निगरानी कर सके और उन्हें उड़ान में ही नष्ट कर सके। यह प्रणाली काफी हद तक इज़राइल की ‘आयरन डोम’ प्रणाली से प्रेरित है, लेकिन इसका दायरा कहीं ज्यादा व्यापक होगा। इस घोषणा के तुरंत बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि कनाडा अमेरिका के साथ गोल्डन डोम और NORAD जैसे रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में चर्चा कर रहा है।
ट्रंप ने कहा कि यह कार्यक्रम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के उस 'स्टार वार्स' कार्यक्रम का आधुनिक संस्करण है, जिसे 1980 के दशक में प्रस्तावित किया गया था। उन्होंने कहा, “रीगन के पास वो तकनीक नहीं थी, जो अब हमारे पास है।” हालांकि, इस परियोजना की लागत और समय-सीमा को लेकर विशेषज्ञों में संशय है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विशेषज्ञ टॉम कराको ने कहा, "175 अरब डॉलर की बात हो रही है, लेकिन सवाल है कि यह खर्च कितनी अवधि का होगा संभवतः 10 वर्षों का।"
कांग्रेस के बजट कार्यालय ने एक अनुमान में बताया है कि गोल्डन डोम प्रणाली पर अगले दो दशकों में कुल खर्च 831 अरब डॉलर तक हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि इस योजना से अलास्का, फ्लोरिडा, जॉर्जिया और इंडियाना जैसे राज्यों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रारंभिक चरण में सिस्टम के कई हिस्से मौजूदा उत्पादन लाइनों से लिए जाएंगे। पेंटागन अब उन मिसाइलों, सेंसरों और उपग्रहों का परीक्षण शुरू करेगा, जो इस प्रणाली का हिस्सा होंगे।





