कर्नाटक के प्रभारी महासचिव सुरजेवाला ने विधायकों के साथ बैठक के बाद कहा कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल ही नहीं है। कांग्रेस सरकार पांच साल तक स्थिर और मजबूत रहेगी। उन्होंने विधायकों से यह भी कहा कि यदि कोई मतभेद या सुझाव हो, तो उसे पार्टी मंच (फोरम) पर ही रखें और सार्वजनिक रूप से बयानबाज़ी से बचें।
सुरजेवाला ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी विधायकों से मुलाकातें किसी संकट या असंतोष के चलते नहीं थीं, बल्कि सरकार के कार्यक्रमों और कांग्रेस की 'गारंटी योजनाओं' के ज़मीनी असर का आकलन करने के लिए थीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कुछ दिन पहले इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा था, “किसी भी प्रकार का नेतृत्व परिवर्तन हो या कोई बड़ा फैसला लेना हो, तो वह पार्टी का आलाकमान ही करेगा। अनावश्यक भ्रम और बयानबाज़ी से बचना चाहिए।” खड़गे ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया था कि वे एकजुट रहकर सरकार के कार्यों पर ध्यान दें और मीडिया में आंतरिक मतभेदों को लेकर चर्चा न करें।
सीएम सिद्धारमैया ने खुद को हटाए जाने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि कांग्रेस की सरकार कर्नाटक में पांच साल तक चट्टान की तरह मजबूत बनी रहेगी। मेरी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अच्छी समझ और आपसी तालमेल है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में लगातार काम कर रही है और मध्यावधि बदलाव की कोई ज़रूरत नहीं है।





