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Rajyasabha में खरगे और गडकरी के बीच हुई तकरार, गडकरी ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही खटपट का मुद्दा बना दिया

खरगे ने राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और उनकी प्रगति पर सवाल उठाए थे, लेकिन गडकरी ने इसे मौके के रूप में लिया और कांग्रेस अध्यक्ष को उनकी पार्टी के |

Rajyasabha में खरगे और गडकरी के बीच हुई तकरार, गडकरी ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही खटपट का मुद्दा बना दिया
फोटो: Rajyasabha में खरगे और गडकरी के बीच हुई तकरार, गडकरी ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही खटपट का मुद्दा बना दिया
राज्यसभा में बुधवार को एक दिलचस्प और अप्रत्याशित नजारा देखने को मिला, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को घेरने की कोशिश की, लेकिन उनका यह प्रयास पूरी तरह से उलटा पड़ता हुआ दिखा। खरगे ने राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और उनकी प्रगति पर सवाल उठाए थे, लेकिन गडकरी ने इसे मौके के रूप में लिया और कांग्रेस अध्यक्ष को उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री और अन्य प्रमुख नेताओं के बीच चल रही कथित खटपट की याद दिला दी, जिससे खरगे को जवाब देने में कठिनाई हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरगे ने बेंगलुरु से कलबुर्गी को जोड़ने वाले फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट के मुद्दे को उठाया था और इसके माध्यम से उन्होंने गडकरी पर निशाना साधने की कोशिश की थी।

 इसके बाद खरगे ने यह भी टिप्पणी की कि गडकरी के पास अब पहले जैसी ताकत नहीं रह गई। खरगे ने कहा, "अगर मेरी बात गलत है, तो मैं इसे वापस लेता हूं, लेकिन मुझे जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्गों को नंबर देने का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचता है।" खरगे ने आगे यह भी कहा, "मुझे यह जानकारी मिली है कि आप बॉन्ड्स और अन्य तरीकों से फंड जुटा रहे हैं, और ये सब आप अपनी ताकत से कर रहे हैं। आपका दिमाग तेज है, लेकिन अगर फंड्स नहीं मिलते तो आप रास्ता निकाल लेंगे।" साथ ही उन्होंने यह कहा, "अब आप प्रधानमंत्री की तारीफ कर रहे हैं, मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी, क्योंकि प्रधानमंत्री ही हैं जो राजमार्गों के लिए पूरा श्रेय ले रहे हैं।"

 गडकरी का जवाब गडकरी ने खरगे के इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा, "मैं खरगे जी को यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि राष्ट्रीय राजमार्गों को नंबर देने के समय कभी भी कोई फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय तक नहीं जाती है। प्रधानमंत्री ने मुझे नियुक्त किया है, और मैं उनके आदेश पर काम करता हूं। मुझे इस प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं होती।" उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की फंड की कमी नहीं है, और राजमार्गों के निर्माण में देरी का कारण पर्यावरण मंजूरी, राज्य सरकारों द्वारा जमीन अधिग्रहण में समस्याएं और कोर्ट में लंबित मामले हैं। गडकरी ने यह भी कहा, "आपके मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कहते हैं कि पहले से कहीं अधिक काम हुआ है। आप उनसे इस बारे में पूछ सकते हैं, हालांकि मुझे नहीं पता कि आपकी उनसे कोई चर्चा होती है या नहीं।"

 हालांकि, इस दौरान गडकरी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का नाम नहीं लिया, जो इस संदर्भ में महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। यह स्थिति ऐसी थी, जिसमें गडकरी ने न केवल खरगे के आरोपों का जवाब दिया, बल्कि यह भी साफ किया कि वह बिना किसी दबाव या परेशानी के अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और उनके काम में किसी भी प्रकार की रुकावट या फंड की कमी नहीं है। यह घटनाक्रम राज्यसभा में एक दिलचस्प टकराव का हिस्सा बना, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को जवाब देते हुए उन्हें उनकी पार्टी के भीतर की समस्याओं की ओर इशारा किया, और इस तरह से इस बहस ने राजनीतिक विवाद के एक नए मोर्चे को खोल दिया।

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