कुलदीप सिंह धालीवाल से छीना अहम विभाग
भगवंत मान सरकार ने शुक्रवार शाम को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल से प्रशासनिक सुधार विभाग छीन लिया। अब वह केवल एनआरआई मामलों को संभालेंगे। राज्यपाल कार्यालय ने भगवंत मान की सलाह पर इस बदलाव की गजट अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस कदम को पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन बदलने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। इसी दिन पंजाब सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए 21 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए।
गृह विभाग ने कई अहम पदों पर फेरबदल किया, जिसमें एसएसपी, पुलिस कमिश्नर (सीपी) और डीआईजी जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। फिरोजपुर और होशियारपुर के एसएसपी को हटाकर नए अधिकारियों की तैनाती की गई, वहीं लुधियाना रेंज के डीआईजी, एआईजी इंटेलिजेंस और एआईजी क्राइम के पदों पर भी बदलाव किए गए। इस कदम से साफ है कि पंजाब सरकार प्रशासन में व्यापक सुधार करने के मूड में है।
वकीलों से सामूहिक इस्तीफे की मांग, बढ़ा तनाव
इन बड़े बदलावों के बीच पंजाब सरकार ने अटॉर्नी जनरल ऑफिस में तैनात वकीलों से सामूहिक रूप से इस्तीफे देने की मांग की, जिससे राज्य की सियासत में हलचल मच गई। उच्च अधिकारियों द्वारा इस तरह की मांग किए जाने से कानूनी मोर्चे पर भी सरकार की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली में AAP की करारी हार के बाद अब पार्टी का सारा दारोमदार पंजाब पर टिक गया है। दिल्ली में 2013 से सरकार चला रही आम आदमी पार्टी को इस हार ने झकझोर दिया है। 2022 में जब AAP ने पंजाब में सत्ता संभाली थी, तब पार्टी के लिए यह एक बड़ी जीत मानी गई थी। लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और कांग्रेस ने उससे अधिक सीटें जीतकर उसे कड़ी चुनौती दे दी। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी के लिए यह राह आसान नहीं होगी।
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